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‘विक्रमोत्सव 2026’ में एमपी टूरिज्म का पवेलियन बनेगा आकर्षण केंद्र, पर्यटन स्थलों की मिलेगी जानकारी

Vikramotsav 2026 : विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत वाराणसी में आयोजित यह महानाट्य केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन, न्यायप्रियता और गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।
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उज्जैन

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Mohammad Faiz Mubarak

•

Updated: 2 Apr 2026, 7:51 AM IST

Vikramotsav 2026

3 से 5 अप्रैल को वाराणसी में महानाट्य का भव्य मंचन (Photo Source- mohan yadav X Handle)

Vikramotsav 2026 : विक्रमोत्सव 2026 के तहत मध्य प्रदेश के उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आगामी 3 से 5 अप्रैल के बीच वाराणसी में महानाट्य का मंचन किया जा रहा है, जिसका भव्य शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में होगा।

सम्राट विक्रमादित्य शोध संस्थान के माध्यम से बी.एल.डब्ल्यू. मैदान आयोजित होने वाले इस महानाट्य में सैकड़ों कलाकार हिस्सा लेंगे। आयोजन में हाथी, घोड़े और ऊंटों के साथ प्राचीन विधाओं का जीवंत प्रदर्शन होगा। वहीं इस दौरान मध्य प्रदेश की पारंपरिक कला, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत के साथ पर्यटन स्थलों के आकर्षक रूप में प्रदर्शित करता एमपी टूरिज्म पवेलियन आकार्षण का केंद्र होगा।

सीएम की परिकल्पना से तैयार हुआ 'सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य'

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की परिकल्पना से तैयार पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित द्वारा रचित और राजेश कुशवाहा द्वारा निर्मित और संजीव मालवी के भाव निर्देशन में प्रस्तुत महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य भारत की सांस्कृतिक चेतना को जगाने वाला अनुभव है। इसमें 200 से ज्यादा कलाकार हाथी, घोड़े, रथ, पालकियां भव्य युद्ध लाइट शो, आतिशबाजी नृत्य और बाबा महाकाल की भस्म आरती की दिव्या झलकियां शामिल है। महान सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से राजतिलक तक की गाथा, विक्रम बेताल की कथा और सनातन धर्म के उत्थान की महा काव्य कथा इस महानाट्य में जीवंत होती है।
प्रदेश की विविधता और वैभव से परिचित कराएगा आयोजन

सचिव, मुख्‍यमंत्री और पर्यटन डॉ. इलैयराजा टी. ने कहा कि, विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत वाराणसी में आयोजित यह महानाट्य केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन, न्यायप्रियता और गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। इस विशेष अवसर पर एमपी टूरिज्म पवेलियन इस दिशा में एक आकर्षक केंद्र बनेगा, जो आगंतुकों को प्रदेश की विविधता और वैभव से परिचित कराएगा।”

एमपी टूरिज्म पवेलियन बनेगा आकार्षण का केंद्र

3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी में एमपी टूरिज्म पवेलियन में प्रदेश की पारंपरिक कला और अद्भुत कारीगरी देखने को मिलेगी। खजूर की पत्तियों से बनी टेराकोटा कलाकृतियां भी लोगों का ध्यान आकर्षित करेगी। बुंदेली, गोंड और भील पेंटिंग्स में जनजातीय संस्कृति की झलक भी दिखेगी।

एमपी के पारंपरिक व्यंजनों के फूड स्टॉल्स

मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों के फूड स्टॉल्स भी लगेंगे। फूट कोर्ट में इंदौर के प्रसिद्ध पोहा–जलेबी, मक्के के कीस, मालवा की कचौरी, डिंडौरी के उड़ल दाल व कोदो भात और कुटकी के गुड वाली खीर–जलेबी, बघेलखंडी निमोना और पुड़ी, बेड़ई पुड़ी और हींग वाले आलू जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ बुंदेलखंडी स्ननाटा छाछ, लेमन पुदिना, आम पना, सब्जा शिकंजी, गुलाब मलाई लस्सी, मावा बाटी जैसे शीतपेयों और मिष्ठान का नागरिक आनंद ले सकेंगे।