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महाकाल के भक्तों को सड़क पर क्यों करना पड़ रहा है इंतजार

महाकाल मंदिर के विशाल परिसर का उपयोग नहीं

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उज्जैन. महाकाल मंदिर के विशाल परिसर है और इसका उचित उपयोग नहीं होने के कारण भस्म आरती में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को सड़क पर बैठकर प्रवेश का इंतजार करना पड़ता है। इसके लिए मंदिर प्रबंध समिति द्वारा उचित इंतजाम लम्बे समय से नहीं किए है।
श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश बड़ा गणेश मार्ग स्थित भस्म आरती के गेट से दिया जाता है। भगवान महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु अन्य प्रांतों और जिलों से आते हैं। प्रवेश के लिए द्वार रात करीब २.३० बजे खोला जाता है। प्रवेश का उचित स्थान, समय की सही जानकारी नहीं होने के कारण पहले आओ पहले स्थान पाओं को ध्यान में रखकर रात ११ बजे से ही प्रवेश द्वार के सामने आकर सड़कों पर बैठ जाते हैं। महाकाल मंदिर परिसर में जिगजेेक बैरिकेड्स, फेसेलिटी सेंटर भवन के साथ ही कॉरिडोर और मारबल का गलियारा जैसे स्थान है। महाकाल के शयन आरती के बाद इन स्थानों का उपयोग ही नहीं होता है। इसके खाली रहने के बाद भी मंदिर प्रबंध समिति द्वारा भस्म आरती श्रद्धालुओं को प्रवेश देने के संबंध में निर्णय नहीं लिया है। जानकारों के अनुसार भस्म आरती श्रद्धालुओं के लिए स्थानों को उचित उपयोग किया जा सकता है।
कलेक्टर ने जायजा लिया
महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष और कलेक्टर मनीषसिंह ने सोमवार शाम मंदिर के पिछले हिस्से का जायजा लिया । उन्होंने यहां कि खुले नाले को कवर करने के साथ नगर निगम के अधिकारियों को इस क्षेत्र का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत विकाय करने के निर्देश दिए हैं।
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सुरक्षा एजेंसी को भुगतान नहीं, कर्मचारियों को वेतन के लाले
उज्जैन. महाकाल मंदिर प्रबंध समिति द्वारा मंदिर की निजी सुरक्षा एजेंसी को ५ माह से राशि का भुगतान नहीं हुआ है। नतीजतन सुरक्षाकर्मियों के वेतन के लाले पड़ गए हैं। इनको समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने निजी सुरक्षा एजेंसी को ठेका दे रखा है। समिति द्वारा एजेंसी को ५ माह १२ दिन की राशि का भुगतान नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार एजेंसी को ८० लाख रु. का भुगतान होना शेष है। एजेंसी ने १४० कर्मचारियों को जनवरी से मार्च तक तीन माह के वेतन का भुगतान तो अपने खाते से कर दिया, लेकिन राशि नहीं मिलने से अप्रैल- मई का वेतन नहीं दिया है। जून के १८ दिन बीत जाने के बाद भी वेतन के कोई पते नहीं है।
नाममात्र का वेतन वह भी समय पर नहीं
मंदिर में १४० कर्मचारियों की सेवा ली जाती है। प्रति कर्मचारी को प्रति माह करीब ६ हजार रु. वेतन दिया जाता है, लेकिन वह भी समय पर नहींं मिलता है। फिलहाल इनको मार्च तक का वेतन ही मिला है। शर्तों के अनुसार कर्मचारियों को वेतन देने की जिम्मेदारी एजेंसी की है। नौकरी जाने के भय से वेतन के लिए न तो कर्मचारी मंदिर प्रबंध समिति के सामने अपनी बात रखते हैं और न एजेंसी से मांग कर पाते हैं।
शैव महोत्सव का वेतन भी नहीं
जनवरी में प्रदेश शासन और महाकाल मंदिर प्रबंध समिति की ओर से आयोजित शैव महोत्सव के दौरान विभिन्न कार्यक्रम स्थल पर ८ दिन के लिए २०० रु. प्रतिदिन के मान से ३२ कर्मचारियों की सेवा ली गई थी। इसका भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। एेसे में कर्मचारियों को मान देय नहीं मिला है।
अधिकारी बदले, फाइल अटकी
महाकाल मंदिर प्रबंध समिति में छह माह के दौरान चार प्रशासक बदले जा चुके हैं। नतीजतन भुगतान की फाइल लगातार अटकती रही है। इस बीच इधर मंदिर के ऑडिट विभाग ने कर्मचारियों के स्वास्थ्य प्रमाण पत्र और पुलिस सत्यापन पत्र प्रस्तुत करने को लेकर भी फाइल को रोक दिया। खास बात यह है सुरक्षा एजेंसी ६ माह पहले ही प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर चुकी है।