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जानें किन कारणों से प्रधानमंत्री के दौरे से पांच दिन पहले उज्जैन निगम आयुक्त पर गिरी गाज

- उज्जैन नगर निगम आयुक्त अंशुल गुप्ता को मंत्रालय में बिना विभाग के उपसचिव बनाया गया- सीएम शिवराज ने किया था उज्जैन दौरा, भारी पड़ा खराब व्यवहार व काम में लापरवाही

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भोपाल। राज्य सरकार ने पीएम नरेन्द्र मोदी के 11 अक्टूबर के दौरे के पांच दिन पहले गुरुवार को उज्जैन नगर निगम आयुक्त अंशुल गुप्ता को हटा दिया। 2016 बैच के आइएएस अंशुल को मंत्रालय में बिना विभाग के उपसचिव बनाया गया है। अंशुल को काम में लापरवाही और खराब व्यवहार के कारण हटाया गया है।

एक दिन पहले ही नगरीय आवास एवं विकास मंत्री भूपेंद्रसिंह ने उनके कामकाज पर नाराजगी जताई थी। बता दें कि इससे पहले भी अंशुल को खराब व्यवहार के कारण हटाया गया था। नगर निगम उज्जैन के आयुक्त का प्रभार महाकालेश्वर मंदिर प्रशासक संदीप कुमार सोनी को दिया गया है। उनके पास पहले से सीईओ उज्जैन विकास प्राधिकर का अतिरिक्त प्रभार है।

निर्देशों का नहीं हुआ था पालन
सीएम शिवराज सिंह चौहान बुधवार को उज्जैन पहुंचे थे। वहां शिवराज ने महाकाल दर्शन के अलावा महाकाल लोक के लोकार्पण की तैयारियों का मुआयना किया था। इस लोक का लोकार्पण पीएम मोदी 11 अक्टूबर को करेंगे। सूत्रों के मुताबिक सीएम को दौरे में अंशुल की शिकायतें मिली थीं। इसमें लोगों से बेहद खराब व्यवहार करने व काम में लापरवाही की शिकायतें शामिल रहीं। सीएम के पिछले दौरे में भी जो निर्देश दिए गए थे, उनका पालन नहीं हो पाया था। इसके चलते अंशुल को हटा दिया गया।

पहले उमरिया से भी हटाए गए थे
इससे पहले उमरिया में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पद पर रहते हुए भी अंशुल को खराब व्यवहार व काम में लापरवाही की शिकायत पर हटाया गया था। अंशुल को उमरिया से हटाकर ही उज्जैन भेजा गया था। तब, उमरिया में अंशुल को हटाने के लिए कुछ कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट में धरना तक दिया था। कर्मचारियों की शिकायत थी कि अंशुल बेहद बद्तमीजी से व्यवहार करते हैं। अंशुल महू व कुक्षी में एसडीएम भी रह चुके हैं।

निगम परिसर में आतिशबाजी
निगमायुक्त के स्थानांतरण आदेश आते ही निगम परिसर में ढोल बजाकर आतिशबाजी की गई और मिठाइयां बांटी गई। संभवत: निगम में पहली बार है कि किसी अधिकारी के तबादले पर इस तरह खुशियां मनाई गई।

हटाने के ये बड़े कारण
- महाकाल लोक के निर्माण में पहला लोकायुक्त प्रकरण निगमायुक्त अंशुल गुप्ता पर दर्ज होने से विवाद में आए।
- किसी बड़े आयोजन में टीम भावना से काम नहीं।
- वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारियों से समन्वय नहीं।
- निगम कर्मचारी-अधिकारी से समन्वय नहीं, अभद्रता व व्यक्तिगत कार्रवाई कर परेशान करना।