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भस्म आरती के समय महिलाओं को करना पड़ता है घूंघट, जानिए इसकी वजह

महाकाल मंदिर की भस्मा आरती न सिर्फ भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है।भगवान शिव के श्रृंगार के तौर पर होने वाली इस आरती से जुड़े कई नियम भी हैं जो आपको हैरान कर देंगी

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Mahakal Bhasm aarti: द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के महाकाल की भस्म आरती दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसमें शामिल होना भक्तों का सपना होता है। लेकिन इस मंदिर की कई परंपराएं आपको हैरान कर देंगी। इन्हीं में से एक के अनुसार महाकाल की भस्म आरती के समय महिला भक्तों को घूंघट करना पड़ता है। आइये जानते हैं क्या है इसका रहस्य?

इस कारण भस्म आरती के समय दर्शन पर रोक
मान्यता के अनुसार भस्म आरती के समय महाकाल निराकार से साकार रूप धारण करते हैं और उनका भस्म से स्नान करते हैं। इस दौरान उनका अभ्यंग स्नान होता है, जिसके कारण महिलाओं के दर्शन पर रोक है। इसे मंगला आरती के नाम से भी जाना जाता है। यह भस्म संसार के नाशवान होने का संदेश है। भस्म अर्पण के समय पांच मंत्रों का उच्चारण किया जाता है, जबकि आरती तो दीपक की ज्योति से होती है।

भस्म आरती के हैं कुछ नियम कायदे
परंपरा के अनुसार सुबह 4 बजे होने वाली पहली आरती में भगवान शिवजी को भस्म से स्नान कराया जाता है। किंवदंतियों के अनुसार पहले महाकाल की भस्म आरती श्‍मशान सबसे ताजी चिता की राख से किया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होता। अब गाय के कंडे, पीपल, पलाश, शमी और बेर के लकड़ियों को साथ में जलाकर उससे भस्म तैयार किया जाता है और इसीसे भस्म आरती की जाती है।
भस्म आरती के दर्शन के लिए www.shrimahakaleshwar.com पर सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक रजिस्ट्रेशन कराना होता है। भस्म आरती के दर्शन के लिए आए भक्तों को वहां कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है। इसके लिए पुरुष केवल धोती पहनते हैं, यह धोती साफ-स्वच्छ और सूती होनी चाहिए। महिलाओं को आरती में शामिल होने के लिए साड़ी पहनना होता है। वहीं जिस समय शिवलिंग पर भस्म चढ़ाया जाता है, उस समय महिलाओं को घूंघट करने के लिए कहा जाता है। इस समय भगवान के दर्शन की अनुमति नहीं होती।

क्या है कहानी
उज्जैन में महाकाल ज्योतिर्लिंग की स्थापना की एक कथा लोगों में प्रचलित है। इसके अनुसार दूषण नाम के असुर ने पूरे उज्जैन क्षेत्र में आतंक मचा रखा था। लोगों को कष्ट से छुटकारा दिलाने के लिए भगवान शिव प्रकट हुए और लोगों को दूषण के आतंक से मुक्त किया। इसके बाद गांव वालों ने भगवान शिव से इसी जगह रहने का आग्रह किया। गांव वालों की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव यहां ज्योतिर्लिंग रूप में बस गए । भगवान शिव ने असुर दूषण को भस्म कर उसकी राख से अपना श्रृंगार किया था। इसलिए यहां महाकालेश्वर की भस्म आरती की जाने लगी।

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