
जिले में अभी भी 6 फीसदी एेसे लोग जिन्होंने पहला डोज तक नहीं लगवाया, दूसर डोज से 25 फीसदी आबादी वंचित
उज्जैन. कोरोना संक्रमण को लेकर जिला अभी शतप्रतिशत टीकाकरण के साथ सुरक्षित नहीं हो पाया है। महामारी से जीत की राह पर टीकाकरण का सफर जारी है। नि:संदेह कारवां भी लगतार बढ़ता जा रहा है लेकिन यह समय संतुष्ट होकर बैठने या सफर की रफ्तार धीमी करने का नहीं बल्कि और दमखम से आगे बढऩे का है। यह इसलिए क्योंकि मंजिल अभी भी दूर है और छोटा ही सही लेकिन शेष सफर चुनौतीभरा है। एेसे में अब जरूरत शतप्रतिशत टीकाकरण की है और इसके लिए उन लोगों को भी कारवां में शामिल होना ही है जो अब तक किनारे पर खड़े पता नहीं किस मुहुर्त का इंतजार कर रहे हैं।
वर्ष का आखिरी महीना शुरू होने वाला है लेकिन जिले में टीकाकरण पूरा नहीं हो पाया है। अभी भी चिन्हित आबादी का करीब ६ फीसदी हिस्सा एेसा है जिसने कई सुविधाओं के बावजूद अभी तक टीके का पहला डोज भी नहीं लिया है। इसी तरह २५ फीसदी लोग दूसरे डोज से दूर हैं। शेष रहे इन लोगों का टीकाकरण के प्रति यह रूखा रूख स्वयं व समाज के साथ ही उनके परिवार के लिए भी ठीक नहीं है। इन लोगों के लिए टीकाकरण अब और भी जरूरी हो गया है क्योंकि संक्रमण के मामले एक बार फिर बढऩा शुरू हो गए हैं। एेसे में समय रहते यदि यह लोग कोरोना रोधक टीके नहीं लगवाते हैं तो महामारी को दोबारा भयावह रूप लेने न सिर्फ मदद मिलेगी बल्कि इन लोगों के कारण इनके अपने भी खतरे के नजदीक पहुंच सकते हैं।
पूर्ण सुरक्षा में हम कहां चुक रहे
- टीकाकरण के शेष लोगों में अब एेसों की संख्या अधिक है जो टीका लगवाना ही नहीं चाहते हैं। इनकी नासमझी जिले को पूर्णत: सुरक्षित नहीं होने दे रही।
- कुछ लोग एेसे हैं जो किसी बीमारी या अन्य कारण से टीका लगवाने से कतरा रहे हैं।
- जो लोग टीका नहीं लगवा रहे, वह आसानी से चिन्हित नहीं हो पा रहे।
- डोर टू डोर सर्वे या पूछताछ में टीका नहीं लगवाने वाले भी यह झूठ बोल सकते हैं कि उन्होंने टीका लगवाया। सभी मामले में प्रमाणपत्र नहीं देखे जाते।
अब यह कदम उठाने की जरूरत
- जिन्होंने टीका नहीं लगवाया उन्हें ट्रेस करने के लिए मेकेनिज्म तैयार किया जाए।
- फोन पर या डोर टू डोर सर्वे में सिर्फ फोरी पूछताछ पर्याप्त नहीं है। क्रांस जांच पर जोर दिया जाए।
- सभी शासकीय कार्यालय, शॉपिंग मॉल, सिनेमा घर, बस-ट्रेन आदि में प्रवेश से पूर्व टीकाकरण प्रमाण पत्र दिखाना अनिवार्य हो। लोगों को प्रमाण पत्र का कार्ड साथ में रखने के लिए तैयार करें। व्यवस्था का सख्ती से पालन हो।
- यातायात पुलिस वाहनों की जांच के साथ टीकाकरण प्रमाणपत्र की जांच करें। प्रमाण पत्र नहीं होने की स्थिति में शासन इस अर्थ दंड निर्धारित कर सकता है।
- यदि कोई व्यक्ति किसी कारणवश टीका नहीं लगवा पा रहा है तो उसे शासकीय चिकित्सक से इसका प्रमाण पत्र लेने की व्यवस्था हो ताकि वह उक्त प्रमाण पत्र से बस-ट्रेन, कार्यालय में आ-जा सके।
Published on:
28 Nov 2021 01:20 am
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