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उबड़-खाबड़ रास्ते ने गर्भवती के साथ बच्चे को भी पेट में ही मार डाला

एमपी के उज्जैन में शर्मनाक घटना हुई। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही और लचर व्यवस्था के चलते बड़नगर रोड के गांव कमानपुरा के परिवार में खुशियों ने आने से पहले ही दम तोड़ दिया। करीब चार किमी के उबड़-खाबड़ रास्ते ने यहां की एक गर्भवती के साथ उसके बच्चे को पेट में ही मार डाला।

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उज्जैन में शर्मनाक घटना

उज्जैन/खरसौदकलां. एमपी के उज्जैन में शर्मनाक घटना हुई। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही और लचर व्यवस्था के चलते बड़नगर रोड के गांव कमानपुरा के परिवार में खुशियों ने आने से पहले ही दम तोड़ दिया। करीब चार किमी के उबड़-खाबड़ रास्ते ने यहां की एक गर्भवती के साथ उसके बच्चे को पेट में ही मार डाला। अस्पताल पहुंचने से पहले जच्चा-बच्चा की मौत हो गई।

कमानपुरा गांव से खरसौद खुर्द तक बने 8 किलोमीटर के रोड में चार किमी का रोड उबड़खाबड़ है। पति का आरोप है कि इसी खराब रास्ते के कारण उसकी पत्नी व बेटे की मौत हो गई। उबड़खाबड़ रोड में दचके लगने और लेटलतीफी होने से दोनों की जान गई और परिवार उजड़ गया।

गांव के अर्जुन से 24 साल की नीलू का विवाह डेढ़ साल पहले हुआ था। वह गर्भवती हुई तो पूरे परिवार में खुशियां छा गईं। करीब 15 दिन पहले उसकी सोनोग्राफी करवाकर बडऩगर के सरकारी अस्पताल में पदस्थ डॉ. मोनिका कोठारी को दिखाया था। उन्होंने कहा कि बच्चा मोटा है। हो सकता है, ऑपरेशन करना पड़े।

पति अर्जुन ने बताया कि बुधवार सुबह 8 बजे अचानक पत्नी को दर्द उठा तो 108 पर जननी एक्सप्रेस को फोन किया परंतु फोन पर कहा कि गांव का रास्ता उबड़खाबड़ है। आप गर्भवती को खरसौद खुर्द तक ले आओ। इसके बाद मैंने एक जीप की और उससे पत्नी को ले जा रहा था। कमानपुरा से खरसौदखुर्द तक 8 किमी के रास्ते में 4 किमी के रास्ते में बड़े बड़े गढ्डे हैं, जिसमें दचका लगने से पत्नी की हालत और खराब होती गई।

अर्जुन के अनुसार खरसौद खुर्द पहुंचा तो यहां 10 मिनट इंतजार के बाद 108 एम्बुलेंस पहुंची, जिसकी मदद से बडऩगर अस्पताल पहुंचा। यहां डॉ. मोनिका कोठारी ने कहा कि इसकी हालत ज्यादा खराब है, बडऩगर के अस्पताल में पर्याप्त साधन नहीं है। उन्होंने तुरंत उज्जैन रैफर कर दिया। यहां पत्नी को बुधवार सुबह करीब 11.30 बजे लेकर पहुंचा परंतु डॉक्टर ने उसकी नब्ज देखते ही मृत घोषित कर दिया। बच्चा भी मरा हुआ ही निकला।

अर्जुन का साफ कहना है कि पत्नी और बच्चे की जान खराब सड़क की वजह से गई और इसने मेरा परिवार उजाड़ दिया। इसके लिए शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं। जो परिवार को खुशियां देने वाली थी उसे ही छीन लिया।

कल्याणपुरा सरपंच सोहनबाई राठौर के अनुसार चार किमी के रास्ते की कई बार शिकायत की। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी कमानपुरा से खरसौदखुर्द तक के मार्ग के लिए ग्रामीण वर्षों से परेशान है। कई बार विधायक को शिकायत की परंतु काम नहीं हो पाया। अब इसकी मंजूरी हो चुकी है। जल्द पीडब्ल्यूडी इसका निर्माण करने वाली है।

मामले में बड़नगर विधायक मुरली मोरवार ने बताया कि कमानपुरा से पलवा तक का रोड खराब है। भाजपा सरकार में काम नहीं हो पाया। वर्षों के प्रयास के बाद अब पीडब्ल्यूडी इस रोड का निर्माण करेगा। मंजूरी हो चुकी है। काम शुरू होने वाला है। आरएमओ नीतराज गौड का कहना है कि हमारी ओर से पीएम प्रस्तावित था परंतु परिजन बगैर पीएम के ही शव ले गए। इधर सीएमएचओ डॉ. दीपक पिप्पल के अनुसार जच्चा-बच्चा की मौत की जानकारी मिली है। प्रकरण में मेटरनिटी रिव्यू करवाया जाएगा।

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