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वल्र्ड मंकी डे आज : वानरों की देखभाल कर रहे ये हाथ

बंदर का नाम सुनकर या देखकर ही मन में कंपकंपी आने लगती है, लेकिन इसके इतर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कपिराज की सेवा कर रहे हैं।

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 valrd mankee de aaj : vaanaron kee dekhabhaal kar rahe ye haath World Monkey Day today: these hands are taking care of apes

बंदर का नाम सुनकर या देखकर ही मन में कंपकंपी आने लगती है, लेकिन इसके इतर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कपिराज की सेवा कर रहे हैं।

उज्जैन. बंदर का नाम सुनकर या देखकर ही मन में कंपकंपी आने लगती है, लेकिन इसके इतर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कपिराज की सेवा कर रहे हैं। ये नियमित शहर के मंदिरों और अन्य स्थान पर जाते हैं और कपिराज की सेवा करते हैं।
शनिवार को वल्र्ड मंकी डे है। इन दिन विश्व भर में बंदरों के संरक्षण को लेकर बहुत कुछ आयोजन होते हैं। हालांकि उज्जैन में ऐसे कोई आयोजन तो नहीं होते लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो कपिराज की सेवा धर्म मानकर कर रहे हैं। कलालसेरी निवासी चेतन नामदेव नियमित रूप से सिद्धनाथ दर्शन करते जाते हैं। वे वहां पर मौजूद बंदरों को हाथ से केला, मूंगफली, चने आदि खिलाते हैं। बंदर भी नामदेव को देखकर इनके आसपास झुंड बना लेते हैं। नामदेव करीब ५ साल से यह काम कर रहे हैं। इसी प्रकार की सेवा गोपालपुरा निवासी दिनेश पाटीदार भी कर रहे हैं। वे मंगलनाथ मंदिर पर नियमित जाते हैं। यहां मौजूद बंदरों को अपने हाथ से चना, मूंगफली, केले आदि का सेवा कराते हैं।
यहां पर हैं बड़ी संख्या में बंदर
शहर सहित सिद्धनाथ, मंगलनाथ, कालभैरव, चिंतामण मंदिर, राम जनार्दन मंदिर सहित अन्य मंदिरों तो दूरदराज स्थित कॉलोनियों में काफी संख्या में बंदर मिलते हैं। ये दिनभर कॉलोनियों में उत्पात मचाते रहते हैं।
वन विभाग करता है रेसक्यू
वन विभाग के उज्जैन रेंजर जीपी मिश्रा ने बताया कि विभाग पूरे जिले में ग्रामीणों व लोगों को सचेत करता है कि बंदर दिखने पर उन्हें मारने नहीं दौड़े बल्कि उन्हें वहां से हटा दें। साथ उन्हें कोई नुकसान न पहुंचाएं। जिले में करीब ५ हजार से ज्यादा बंद हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या काले मुंह वाले (लंगूर) की है। लाल मुंह वाला बंदर बहुत कम पाया जाता है।
मुआवजे का प्रावधान है
अगर किसी व्यक्ति को बंदर हानि पहुंचाता है तो वन विभाग उसे तुरंत १ हजार रुपए की सहायता देता है। इसके अलावा ज्यादा गंभीर होने पर ३५ हजार रुपए तक सहायता सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई जाती है। इसके लिए पीडि़त पर संपूर्ण कार्रवाई करना जरूरी होता है। बकौल मिश्रा अभी वर्तमान में बडऩगर में तीन और उज्जैन शहर के मिर्ची नाला क्षेत्र में बंदर के काटने पर पीडि़त को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई है।