
गुप्त तरीके से होती है इस नवरात्रि में देवियों की पूजा-उपासना
उज्जैन. गुप्त नवरात्रि की शुरुआत बुधवार 2 फरवरी से हो गई है। वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं, जिनमें दो प्रकट और दो गुप्त नवरात्रि होती हैं। चैत्र और अश्विनि में आने वाली नवरात्रि को प्रकट नवरात्रि कहा जाता है। व आषाढ़ में आने वाली नवरात्रि को गुप्त कहा जाता है।
पंचांगकर्ता ज्योतिषाचार्य पं. चंदन श्यामनारायण व्यास ने बताया गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्या देवियों तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुनेश्वरी, छिन्नमस्ता, काली, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी की गुप्त तरीके से पूजा-उपासना की जाती है। माघ और आषाढ़ महीने में पडऩे वाली गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं पूजन और साधना का अति विशेष महत्व है। गुप्त नवरात्रि में रात्रिकालीन साधना होती है। देवी शास्त्रों की मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्या के पूजन से मनोकामना पूर्ण होती है। गुप्त नवरात्रि में प्रत्यक्ष नवरात्रि जैसा ही साधना, पूजा पाठ करने का नियम है। पहले दिन कलश स्थापना व आखिरी दिन विसर्जन के बाद पारण होता है।
9 दिन नियमों का पालन करें
प्रथम दिवस शुद्धता से नियम एवं संयम के साथ ले संकल्प 9 दिन नियमों का पालन कर सकते हैं। इस बार माघ माह में नवरात्रि 2 फरवरी बुधवार से प्रारम्भ होकर 10 फरवरी गुरुवार तक रहेगी। प्रतिपदा प्रात: 8.31 तक रहेगी, इसके उपरांत द्वितीया लग जाएगी। द्वितीया का क्षय हो रहा है। अत: प्रात: 8.31 के पूर्व ही कलश स्थापन अखंड दीपक लगाना ज्वारे बोना जाप प्रारम्भ करना शुभ रहेगा।
इस नवरात्रि में कोई भी मंत्र, यंत्र, तंत्र सिद्ध कर सकते हैं। इस समय काल में किया हुआ अनुष्ठान कभी निष्पल नहीं होता। एक तिथि क्षय तो एक तिथि वृद्धि द्वितीया का क्षय हो रहा है। अष्टमी तिथि बढ़ रही है। 8 एवं 8 दोनों दिन अष्टमी तिथि मानी जाएगी।
Published on:
02 Feb 2022 04:24 pm
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