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इनका पूजन करने से मिलती है घर में सुख-शांति व निरोगी काया

पाताल वासिनी भद्रा भी शुभ फल देने वाली, तिथि सिद्धांत के अनुसार दिन का दोष नहीं, पर्वकाल पर उत्सव के दिन रविवार का दोष नहीं

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Worship of Dasha Mata, happiness and peace in the house

पाताल वासिनी भद्रा भी शुभ फल देने वाली, तिथि सिद्धांत के अनुसार दिन का दोष नहीं, पर्वकाल पर उत्सव के दिन रविवार का दोष नहीं

उज्जैन. चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि 27 मार्च रविवार के दिन आ रही है। क्योंकि नवमी तिथि 26 मार्च शनिवार को रात्रि 8:05 तक रहेगी। तत्पश्चात दशमी तिथि लगेगी अर्थात अस्तकाल के बाद निशा काल के मध्यम प्रहर में दशमी तिथि का आरंभ होगा। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया शीतला माता की दशमी तिथि की पूजन 27 मार्च रविवार के दिन होगी, वह इसलिए कि रविवार के दिन ही उदय काल में दशमी तिथि का अनुक्रम रहेगा।

धर्म शास्त्र की मान्यता के आधार पर देखें तो तिथि का दिवस काल में साक्षी अनुक्रम व्रत, उत्सव या त्योहार को पूर्ण करता है। शीतला दशमी की पूजन की मान्यता ब्रह्म मुहूर्त से मध्यान्ह तक मानी जाती है। विशेष तौर पर यह पूजन घर पर सुख, शांति, सुख- समृद्धि निरोगी काया, दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य आदि की दृष्टि से की जाती है। ऐसी स्थिति में जब तिथि का भ्रम हो या दिन का भ्रम हो तो संशय की स्थिति सामने आती है। शास्त्रीय मान्यता से देखें तो तिथि का पूजन ही मान्य है, इस दृष्टि से रविवार के दिन पीपल के पूजन का कोई दोष नहीं है।

तिथि प्रधान उत्सव की धर्म शास्त्रीय मान्यता
उदय काल की तिथि तथा मध्य में तिथि की साक्षी व्रत व त्यौहार को पूर्ण करती है, चूंकि शीतला माता का पूजन ब्रह्म मुहूर्त एवं मध्यान्ह की विशेष अनुक्रम से साधा जाता है, इस दृष्टि से रविवार के दिन तिथि के पूर्ण होने से रविवार के दिन का दोष नहीं होगा इस दिन पूजा की जा सकती है।

रविवार के दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र से बना सर्वार्थ सिद्धि योग
दिवस के दोष को मुक्त करने के लिए नक्षत्रों का संयुक्ती करण शास्त्र में विशेष रुप से उल्लेखित है किस दिन के साथ कौन सा नक्षत्र का संयुक्त होना कौन से योग का निर्माण करता है, इस पर बहुत कुछ कहा गया है इस दृष्टि से रविवार को दोपहर 1:13 तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का परिभ्रमण सर्वार्थ सिद्धि योग बना रहा है, इस दौरान पूजन करने से सभी कार्यों में सिद्धि की प्राप्ति होती है।

पाताल वासिनी भद्रा धन देने वाली शुभ रहेगी
रविवार के दिन प्रात: 7:03 से शाम 6:08 तक भद्रा का भी अनुक्रम रहेगा। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार कन्या, तुला, धनु और मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में आने वाली भद्रा पाताल में निवास करती है यह भद्रा शुभ मानी गई है। इसका पृथ्वी पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होता, इस दृष्टि से इस दिन पूजन करने से यह धन को बढ़ाने वाली बताई गई है।

महिलाएं करेंगी दशा माता की पूजन
गृह दशा सुधारने और सुख-समृद्धि की कामना लेकर महिलाएं रविवार को दशा माता का पूजन करेंगी। कच्चा सूत पेड़ पर लपेटकर सुख-सौभाग्य की कामना की जाएगी। चैत्र कृष्ण दशमी रविवार 27 मार्च को दशा माता का पूजन किया जाएगा। अपने जीवन की दशा और दिशा को सुव्यवस्थित करने के लिए जीवन में धन-धान्य और सुख समृद्धि प्राप्ति के लिए प्रत्येक नारी को दशा माता का यह दिव्य पूजन पूरी पवित्रता एवं श्रद्धा के साथ करना चाहिए।

इस बार दशा माता के पूजन में शिव योग बन रहा

ज्योतिषाचार्य पं. चंदन श्यामनारायण व्यास के अनुसार इस बार दशा माता के पूजन में शिव योग बन रहा है। यह शिवयोग रात्रि 8:14 तक रहेगा। इसी के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग भी इस दिन बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग प्रात: 6:28 से रात्रि 1:12 तक रहेगा, जो इस दिन को और भी खास बना रहा है। इस काल में दशा माता का पूजन करने से समस्त कार्य सिद्ध होते हैं। कई महिलाओं के मन में संशय है कि रविवार के दिन पीपल के वृक्ष का पूजन नहीं होता, परंतु शास्त्रों में तिथि को महत्व दिया है, इसमें वार का दोष नहीं लगता। तिथि पूर्ण होने से यह दोष समाप्त हो जाता है। दशमी तिथि रविवार को शाम 6:04 तक रहेगी, इसीलिए रविवार के दिन दशा माता का पूजन करना शास्त्र सम्मत एवं शुभ है। इसके अतिरिक्त कुल परंपरा एवं मान्यताओं के अनुसार दशा माता का पूजन करना चाहिए। दशा माता का पूजन मुहूर्त प्रात: 7.40 से 12.15 तथा दोपहर 1.39 से 3.9 तक श्रेष्ठ है।

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