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पन्द्रह लाख में नहीं हो रही शहर की सफाई

बारिश नजदीक और नाली-नालों में भरी गंदगी

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Cleanliness of the city not going in fifteen lakhs

Cleanliness of the city not going in fifteen lakhs

उमरिया. मई माह प्रारंभ हो गया है जल्द बरसात की उल्टी गिनती शुरू जायेगी, लेकिन नगरपालिका का विशेष सफाई अभियान अभी शुरू नहीं हुआ है। 50 हजार की आबादी वाले नगरपालिका में 15 वार्ड हैं। पूरे शहर की सफाई के लिए नगरपालिका में 120 सफाई कर्मचारी हैं। संसाधन भी पर्याप्त हैं पर नियमित सफाई को शहर तरसता रहता है। कहीं झाडू लग जाती है तो कचरा नहीं उठता है। कचरा उठ जाए नाले-नालियां साफ नहीं होते हैं। शहर की ज्यादातर नालियां कचरा से भरी पड़ी हैं। बीते सप्ताह हुई बारिश में नालियों का मलबा सडक़ों पर तैरने लगा था। हालांकि नगरपालिका ने बरसात आने के पूर्व से ही विशेष सफाई अभियान शुरू करने का दावा किया है। नियमित सफाई में बरती जा रही लापरवाही पर किसी के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं है।
ज्ञातव्य हो कि सभी वार्डो के घरों से निकलने वाले कचरा नपा के ट्रेक्टर से संग्रहण हो रहा है वह भी कभी कभार ही नजर आता है। जिससे वार्डवासियों को खासा सुविधाओं का सामना करना पड़ता है। बताया गया है कि नगर के पॉश इलाके ट्रामा सेंटर के सामने हमेशा ही कचरे का ढेर लगा रहता है। अस्पताल के सामने नाली की हफ्तों सफाई नहीं होती है। ज्वालामुखी के पास नाला की अर्से से सफाई नहीं हुई है। झिरिया मोहल्ला स्थित नाली, कैम्प, पाली रोड, बहराधाम के पास नाला, चौपाटी के पास का नाला, स्टेशन रोड की नाली गंदगी से बजबजा रहे हैं। सुभाषगंज स्थित नाली और फजलगंज का नाला भी बदहाल है। नगर की सफाई व्यवस्था का आलम यह है कि नगरपालिका कार्यालय के ठीक सामने पेट्रोल के पास नाला गंदगी एवं कचरा से भरा पड़ा है। नगरपालिका कार्यालय के सामने ही नाला की यह स्थिति है। इस नाला की भी महीनों से सफाई नहीं होती है। लुहारगंज, छटन बस्ती, भंगहा आदि ऐसे क्षेत्र हैं जहां माह में एकाध बार झाडू भी लग जाए तो यहां के निवासी अपना सौभाग्य समझते हैं। बताया गया है कि शहर के अधिकांश नाला अतिक्रमण के शिकार हैं। अतिक्रमण से नाला सिकुड़ते जा रहे हैं। नालों के किनारे झोपडिय़ां बनती जा रही हैं। जिससे इनकी सफाई करने में भी नगरपालिका को मशक्कत करना पड़ती है। नगरपालिका के अमले ने बढ़ते अतिक्रमणों को रोकने में कोई प्रयास नहीं किए। जिससे अतिक्रामकों के हौसले बुलंद होते हैं। बाद में यही अतिक्रमण नासूर बन जाते हैं।
नगर में बढ़ रही मच्छरों की फौज
शहर में नियमित सफाई नहीं होने से मच्छरों की फौज बढ़ रही है। बारिश में यही गंदगी जब सड़ती है तो वहां के निवासियों का सांस लेना दूभर होता है। जिससे संक्रामक बीमारियां फैलने का डर बना रहता है। मच्छर उन्मूलन के लिए वैसे तो नगरपालिका के पास फॉगिंग मशीन भी है लेकिन इसका उपयोग सीमित क्षेत्र में होता है। शहर के अधिकांश लोगों ने तो शायद फॉगिंग मशीन देखी भी नहीं हो।
संसाधन भरपूर पर समस्या बरकरार
शहर की 50 नालियों और आठ नालों की सफाई के लिए नगरपालिका में पर्याप्त संसाधन हैं। 120 सफाई कर्मचारियों का अमला है। कचरा उठाने के लिए पांच बड़े टे्रेक्टर हैं। घर-घर कचरा संग्रहण के लिए पांच छोटे ट्रेक्टर हैं। सफाई कर्मचारियें के वेतन पर हर माह दस लाख रुपये खर्च होते हैं। लगभग तीन लाख रुपये डीजल एवं 50 हजार रुपये कीटनाशक दवाओं पर व्यय किए जाते हैं। औसतन हर माह सफाई व्यवस्था पर करीब 15 लाख रुपये व्यय हो रहे हैं। फिर भी लोगों को गंदगी से निजात नहीं मिल रही है।
इनका कहना है
नपा में सफाई के लिए पर्याप्त अमला और संसाधन हैं। बरसात आने के पूर्व से ही विशेष सफाई अभियान शुरू किया जाएगा। जिसमें शहर के नाला, नालियों का प्राथमिकता से सफाई कराई जाएगी।
हेमेश्वरी पटले, सीएमओ नपा उमरिया।