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इस बिजली परियोजना की इंदिरा गांधी ने रखी थी आधारशिला

ताप व जल दोनों तरह से विद्युत का उत्पादन संगांतावि में एक और लघु जल विद्युत केन्द्र किया जा रहा है तैयार

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Indira Gandhi laid the foundation stone for this power project

इस बिजली परियोजना की इंदिरा गांधी ने रखी थी आधारशिला

उमरिया. बिरसिंहपुर पाली स्थित संजय गांधी ताप विद्युत केन्द्र प्रदेश का सर्वप्रथम ऐसा विद्युत गृह हैं, जिसमें ताप एवं जल दोनो प्रकार से विद्युत का उत्पादन होता हैं। मैकल पर्वत की सुरम्य श्रेणियॉ इसको सुंदरता एवं चार दीवारी प्रदान करती हैं। जिससे इसकी रमणीयता और बढ जाती हैं। योजना आयोग द्वारा संजय गॉधी ताप विद्युत गृह की स्थापना हेतु जुलाई 1980 में स्वीकृत के पश्चात प्रथम चरण की 2-210 मेगावाट इकाईयों की परियोजना की आधारशिला तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के द्वारा 20 जुलाई 1981 को रखी गई थी। जिसके साथ ही इस विद्युत संयत्र की विकास यात्रा का आरम्भ हुआ। इस विद्युत गृह के उपयोग हेतु आवश्यक जल प्रदाय करने के लिए जोहिला नदी पर एक बॉध बनाया गया हैं। इसी बॉध पर एक 20 मेगावॉट की जल विद्युत इकाई का निर्माण बीएचईएल (भेल) की सहायता से किया गया हैं और यह इकाई नवम्बर 1991 से क्रियाशील हैं। इसके पश्चात् मार्च 1989 मेें द्वितीय चरण की 2 गुणे 210 मेगावॉट की दो इकाईयों की स्थापना हेतु शासन द्वारा स्वीकृत प्रदान की गई। प्रथम एवं द्वितीय चरण की इकाईयों की स्थापना पूर्व में की जा चुकी है। प्रथम चरण की इकाईयां क्रमश: मार्च 1993 एवं नवम्बर 1994 तथा द्वितीय चरण की इकाईयां फरवरी 1999 एवं नवम्बर 1999 से क्रियाशील हैं। बिरसिंहपुर में 20 मेगावॉट जल विद्युत गृह होने से इस परियोजना की अन्य इकाईयों को ग्रिड फेल होने की स्थिति में भी क्रियाशील किया जाना संभव हैं। तदोपरांत अन्य ताप विद्युत गृहों को क्रियाशील करने हेतु आवश्यक विद्युत उपलब्ध करायी जा सकती हैं। इसके अतिरिक्त मे. एसेन्ट हाइड्रो पूणे द्वारा 2-1100 किलोवॉट का एक लघु जल विद्युत केन्द्र, पावर हॉउस के डिस्चार्ज केनाल पर स्थापित किया जा रहा है।
इस जलाशय मे यहां के स्थानीय मछुवारों के जीवकोपार्जन हेतु मछली पालन योजना बनाई गई है, ताकि स्थानीय मछुवारों को रोजगार उपलब्ध हो सके। इस विद्युत परियोजना को स्थापित करने के लिये लगभग 3000 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है।
इस जल विद्युत गृह एवं बांध की सम्पूर्ण डिजाइन का कार्य विद्युत मंडल के अभियंताओं द्वारा ही किया गया है। इसके मध्य प्रदेश मे ऊर्जा की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के उद्देश्य से तृतीय चरण मे 2-500 मेगावॉट संयंत्र स्थापना हेतु शासन की स्वीकृति के पश्चात 10 मार्च 2003 को मे. बी.एच.ई.एल. (भेल) को आशय पत्र जारी किये गये। इस इकाई की स्थापना के लिये बी.एच.ई.एल. (भेल) को 163.5 करोड़ रुपए की अग्रिम राशि का 27 जून 2003 को भुगतान किया गया था, जो कि कॉट्रेक्ट की इफेक्टिव तारीख मानी गई। इस परियोजना के वित्त पोषण हेतु मे. पी.एफ.सी. द्वारा रू. 1560 करोड़ ऋण प्रदत्त किया गया है तथा शेष राशि राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई है। इकाई क्रमांक 5 की अनुमानित लागत लगभग 2300 करोड़़ रुपए है। 500 मेगावॉट की क्षमता वाली इस इकाई से प्रतिवर्ष लगभग 3723 मिलियन यूनिट का विद्युत उत्पादन है। इसमे कोयले की अनुमानित खपत 27.8 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है। पानी की अनुमानित खपत 1600 क्यूबिक मीटर प्रतिघंटा हैं। इस इकाई की स्थापना के साथ ही यह संजय गॉधी ताप विद्युत गृह की उत्पादन क्षमता 1360 मेगावॉट हो गई है। विद्युत गृह की इस विस्तार इकाई की स्थापना का लाभ औद्योगिक रूप से पिछड़े एवं आदिवासी बहुल शहडोल एवं उमरिया जिले के अतिरिक्त सम्पूर्ण मध्यप्रदेश को प्राप्त हो रहा हैं। जिससे औद्योगिक, कृषि एवं रोजगार संबंधी योजनाओं का भी विकास हुआ हैं।
इस इकाई का संचालन पूर्णत: कम्प्यूटर प्रणाली पर आधारित है। इस इकाई से उत्पादित विद्युत की निकासी की व्यवस्था पूर्व से निर्मित ट्रांसमिशन लाईनों के अतिरिक्त नवनिर्मित 220 के.व्ही. बिरसिंहपुर-जबलपुर लाइन द्वारा किया जा रहा हैं।´