
Janmashtami festival: Fair held in the court of Bandhwadheesh
उमरिया. कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर बांधवगढ़ ताला स्थित मेले का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बांधवाधीश महाराज के दर्शन करने प्रदेश की जन जातीय कार्य मंत्री दर्शन करने पहुंची। वहीं कलेक्टर उमरिया संजीव श्रीवास्तव एवं पुलिस अधीक्षक विकास कुमार शाहवाल अपने परिवार के साथ दर्शन किए। इसके साथ ही लोगों ने अपने घरों में भी कृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन किया। इस अवसर पर कृष्ण जी की विधिवत पूजा अर्चना की गई। जिले के गोपाल मंदिर सहित अन्य कृष्ण जी के मंदिरों में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। बांधवाधीश महराज के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को मास्क लगाना तथा सामाजिक दूरी का पालन करना अनिवार्य था। बांधवाधीश महाराज की पूजा अर्चना के लिए एक बार में पांच वाहनों को जाने की अनुमति थी। इसके अतिरिक्त 30 व्यक्तियों के पैदल जाने की अनुमति थी।
ताला स्थित मेले का लिया जायजा
अपर कलेक्टर अशोक ओहरी द्वारा मेले का जायजा लिया गया। मेले में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सिद्धार्थ पटेल अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मानपुर की ड्यूटी लगाई गई थी। इसी तरह रमेश परमार तहसीलदार एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, अनुराग सिंह नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट मानपुर की ड्यूटी मेन गेट एवं मेला क्षेत्र ग्राम ताला, दशरथ सिंह नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट मानपुर की ड्यूटी मंदिर क्षेत्र एवं पहाड़ी के ऊपर तथा शेष शैय्या के पास बृंदेश पाण्डेय तैनात किया गया। अनुविभाग के अनुविभागीय अधिकारी द्वारा कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए कानूनन व्यवस्था देखी। एसपी ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल को तैनात किया था। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अन्य स्थानों में जाना पूर्णत: प्रतिबंधित किया गया था। किला मंदिर जान के लिए पूर्व निर्धारित मार्ग के अतिरिक्त अन्य मार्ग पर जाना प्रतिबंध किया गया था। पैदल जाने वाली यात्री विश्राम के लिए केवल शेष शैय्या में ही रूके। इसके अतिरिक्त अन्य स्थानों पर प्रतिबंध लगाया गया था।
इसलिए खास है किला
बाघों की घनी आबादी के लिए मशहूर मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बीचो-बीच पहाड़ पर मौजूद है बांधवगढ़ का ऐतिहासिक किला। इस किले के नाम के पीछे भी पौराणिक गाथा है। कहते हैं भगवान राम ने वनवास से लौटने के बाद अपने भाई लक्षमण को ये किला उपहार में दिया था इसीलिए इसका नाम बांधवगढ़ यानी भाई का किला कहा जाता है। बांधवगढ़ की जन्माष्टमी सदियों पुरानी है, पहले ये रीवा रियासत की राजधानी थी तभी से यहां जन्माष्टमी का पर्व धूमधूाम से मनाया जाता रहा है और आज भी रीवा रियासत के लोग सबसे पहले पहुंचकर पूजा करते हैं।
बाघिन का है साम्राज्य
बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व के ताला रेंज में बांधवाधीश महाराज का किला है। यह इलाका स्थानीय बाघिन का है। आसपास अन्य शावकों वाली बाघिन का मूवमेंट भी है। चूंकि उमरिया के अलावा यहां दूसरे प्रदेश से भी लोग श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के लिए पहुंचते हैं। दशकों से चली आ रही परंपरा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। बारिश में बाघों के मूवमेंट को देखते हुए पार्क प्रबंधन की तरफ से इंतजाम किए गए थे। गेट से प्रवेश करते हुए 15 किमी. एरिया में डेढ़ दर्जन से अधिक ट्रैकिंग पाइंट बनाए गए थे। इनकी मदद से जंगली जानवरों के मूवमेंट पर नजर रखी जा रही थी।
Published on:
30 Aug 2021 11:02 pm
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