उन्होंने कहा, मैं केएससीए का छह साल तक निदेशक रहा, लेकिन इसके बाद उन्होंने मुझे मौका नहीं दिया। ऐसा क्यों हुआ। क्या मेरा प्रदर्शन खराब था। किस आधार पर। यह सिर्फ अहम है। यह पूछने पर कि उन्हें किसने निराश किया, किरमानी ने कहा, और कौन। उनकी कुर्सी की ताकत बोलती है। उनकी पैसे की ताकत बोलती है। आईपीएल टीमों की अगुआई भारतीयों की जगह विदेशी खिलाडिय़ों द्वारा करने के मुद्दे पर किरमानी ने कहा कि सभी देशों को पहले अपने खिलाडिय़ों को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि कप्तानी और कोच के दावेदारों की कमी नहीं है।
गौरतलब है कि 2015 सत्र में दिल्ली डेयरडेविल्स, किंग्स इलेवन पंजाब, सनराइजर्स हैदराबाद और राजस्थान रायल्स ने विदेशी खिलाडिय़ों को अपना कप्तान बनाया था। किरमानी ने कहा कि वह कोचिंग पद के भूखे नहीं हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि उन्हें खेल की सेवा करने का मौका नहीं मिला।