कर प्रक्रिया को तर्कसंगत बनाने की कोशिशों के लिहाज से आगामी बजट काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। खासतौर से यह बजट कॉरपोरेट टैक्स की दर घटाने का सिलसिला शुरू कर सकता है। हालांकि, वित्त मंत्री की तरफ से उन रियायतों की वापसी का रोडमैप भी आ सकता है, जिसका इंतजार कॉरपोरेट सेक्टर पिछले बजट के बाद से कर रहा है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट 2015-16 में कॉरपोरेट टैक्स की दर घटाकर चार साल की अवधि में 25 फीसद पर लाने और कर रियायतों को चरणबद्ध तरीके से वापस लेने का एलान किया था। हालांकि, सरकार अब तक कोई स्पष्ट रोडमैप पेश नहीं कर पाई है। वित्त मंत्री की कोशिश होगी कि आम बजट में औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के अनुकूल कर संरचना और प्रणाली पेश की जाए। साथ ही परोक्ष करों की दरों को प्रस्तावित जीएसटी की दरों के समान लाने का प्रयास भी होगा। फिलहाल कॉरपोरेट टैक्स की दर 30 फीसद है, लेकिन प्रभावी टैक्स दर मात्र 23.22 फीसद ही है। बड़ी कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स की दर इससे भी कम है।