नागौर. इस वर्ष की हरियाली अमावस बेहद शुभ नक्षत्रों के संयोग में चार अगस्त को मनाई जाएगी। हरियाली अमावस्या पर सिद्धि योग, रवि पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इन नक्षत्रों के संयोग से इसे बेहद शुभ माना जा रहा है। पंडित सुनील दाधीच ने बताया कि सिद्धि योग 4 अगस्त यानि की रविवार को सुबह सूर्योदय से लेकर सुबह 10 बजकर 36 तक मिनट तक रहेगा। रवि पुष्य योग सुबह छह बजकर दो मिनट से दोपहर एक बजकर 26 मिनट तक रहेगा। इसी तरह से सर्वार्थ सिद्धि योग भी सुबह छह बजकर दो मिनट से से दोपहर एक बजकर 26 मिनट तक रहेगा। पुष्य नक्षत्र भी सूर्योदय से लेकर दोपहर एक बजकर 26 मिनट तक रहेगा। इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र लग जाएगा।
इसलिए सावन की अमावस्या को कहते हैं हरियाली अमावस
हरियाली अमावस्या सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन मनाई जाती है। इस वर्ष हरियाली अमावस्या पर चार शुभ संयोग बनने से इस बार श्रावण अमावस्या विशेष शुभ मानी जा रही है। हरियाली अमावस्या का इंतज़ार साल भर रहता है, क्योंकि यह पौधे लगाने का सबसे अच्छा समय माना जाता है। इस समय बारिश के कारण पूरी धरती पर खूब हरियाली होती है। इसी कारण से सावन की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है।
हरियाली अमावस्या की यह रहेगी तिथि
सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि आरंभ तीन अगस्त को दोपहर 3 बजकर 51 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन यानि की चार अगस्त को शाम चार बजकर 43 मिनट तक रहेगी। सूर्योदय की उदयातिथि के अनुवार हरियाली अमावस्या का पर्व चार अगस्त को ही मनाय जाएगा।
इस दिन नहीं तोडऩे चाहिए पेड़ या पत्तियां
हिंदू परंपरा में पेड़-पौधों को भगवान के रूप में भी पुजा गया है, और लोग हरियाली अमावस्या के दौरान उनकी पूजा करते हैं। कुछ जगहों पर इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने की प्रथा है। हरियाली अमावस्या के दिन पेड़-पौधे लगाना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन यथा संभव किसी भी पेड़ को काटना और उसकी शाखा या फूल पत्तियां तोडऩे से बचना चाहिए।
पूर्वजों को समर्पित है यह दिन
अमावस्या का दिन पूर्वजों को समर्पित है। हरियाली अमावस्या के दिन पितरों को तर्पण देना और दान-पुण्य करना भी बहुत उपयोगी होता है। पितरों को तर्पण और पिंडदान करना शुभ माना जाता है क्योंकि अमावस्या पर्व पितरों की प्रसन्नता के लिए विशेष अवसर माना जाता है
पौधे लगाना शुभ होता है
पौराणिक कथाओं के अनुसार, पीपल के पेड़ पर तीनो देवताओं का वास माना जाता है- ब्रह्मा, विष्णु और महेश। यदि आप इस दिन एक पौधा लगाते हैं तो आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी और आपकी सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी। इसलिए हरियाली अमावस्या के दिन किसीनदी में या तीर्थ स्थान में स्नान दान करना चाहिए। इस दिन हरियाली अमावस्या के शुभ अवसर पर शिवपूजन का भी विशेष लाभ प्राप्त होता है। इस दिन भोलेनाथ की प्रसन्नता के लिए रुद्राभिषेक या नम: शिवाय पंचाक्षर मंत्र का जाप तथा महामृत्युंजय मंत्र का जप आदि लाभदायक होता है। कुछ मंदिरों में सावन की वजह से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करके प्रतिष्ठा करके विधि विधान से अभिषेक आदि कार्य किया जाता है। सूर्यास्त से पहले गाजे बाजे के साथ शुद्ध जल में विसर्जन की परंपरा निभाई जाती है। कई मंदिरों में इस दिन कावड़ यात्री कावडिय़ा गंगाजल लाकर भगवान आशुतोष का गंगाजल से अभिषेक भी करते हैं