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जानकी कुंड परियर – मैया जानकी ने अपने वनवास काल का समय बिताया था यहां

- Jankikund Pariyar Unnao - विशाल वटवृक्ष, कुआं, 12 कोशी महारण क्षेत्र मैया जानकी की उपस्थिति का एहसास कराती हैं - पूरे साल भक्तों का सैलाब उमड़ता है जानकी जयंती पर होता है विशेष आयोजन  

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जानकी कुंड परियर

जानकी कुंड परियर - मैया जानकी ने अपने वनवास काल का समय बिताया था यहां

नरेंद्र नाथ अवस्थी

उन्नाव. मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा माता जानकी का त्याग करने के बाद महर्षि बाल्मीकि ने उन्हें अपने आश्रम में आश्रय दिया। इसी दौरान यहां पर लव और कुश का जन्म हुआ। अश्वमेध यज्ञ के दौरान श्री रामचंद्र जी के द्वारा छोड़े गए अश्वमेघ अश्व को लव - कुश द्वारा पकड़ा गया था। जिसके बाद श्री राम की सेना और लव कुश के बीच भीषण युद्ध युद्ध हुआ। एक के बाद एक श्री राम की सेना पराजित होते चली गई। लक्ष्मण को भी पराजय का सामना करना पड़ा। अंत में पहुंचे श्री राम का सामना अपने पुत्र लव कुश से हुआ। 12 कोशी महा रणक्षेत्र, बरगद का पेड़ सहित अन्य कई प्रमाण इस बात की गवाही देते हैं कि यह भूमि कितनी पवित्र है। 12 महीना यहां भक्तों की भीड़ लगी रहती है। जानकी जयंती के अवसर पर यहां भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। जानकी कुंड परियर जनपद मुख्यालय से सड़क मार्ग सेे जुड़ा है।

वनवास काल का समय यहां बिताया था मैया जानकी ने

जानकी कुंड परियर का नाम सामने आते ही आंखों के सामने माता जानकी के बनवास के दृश्य चित्रित होने लगते हैं। जानकी कुंड के पंडित रमाकांत तिवारी ने बताया कि जानकी कुंड परियर धार्मिक रूप से जनपद में ही नहीं आसपास के क्षेत्रों में भी विचार थे जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग माता जानकी के दरबार में माथा टेकने आते हैं उन्होंने बताया कि लक्ष्मण द्वारा यहां पर जानकी को छोड़ा गया था जिसके बाद बाल्मीकि ने उन्हें अपने आज से दिया और यहीं पर उनके दो पुत्र लव और कुश का जन्म हुआ उन्होंने बताया कि पास के गांव पावा में लव और कुश ने अश्वमेघ यज्ञ का अश्व पकड़ा था और विशाल वट वृक्ष में बांधा था उन्होंने बताया कि नवाबगंज के निकट स्थित कुशहरी देवी मंदिर में उसने माता की स्थापना की थी। पंडित रमाकांत ने बताया कि जानकी जयंती के मौके पर यहां भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है और पूरा परिसर मेला शुरू हो जाता है अखंड रामायण के साथ भंडारे का भी आयोजन किया जाता है मैया जानकी सबकी मनोकामना पूरी करते हैं।

इस प्रकार पहुंच सकते हैं जानकी कुंड परियर

उन्नाव से सड़क मार्ग द्वारा जानकी कुंड परियर जुड़ा हुआ है। जो जनपद मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर है। उन्नाव से थाना गांव होते हुए चकलवंशी चौराहा पहुंचा जाता है। यह उन्नाव सफीपुर, बांगरमऊ, हरदोई मार्ग पर स्थित है। चौराहे से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर परियर गांव मार्ग पर स्थित है जानकी कुंड। क्षेत्र में किसी से भी जानकारी करने पर जानकी कुंड परियर पहुंचा जा सकता है। गूगल मैप पर यह हिंदी में परियार व अंग्रेजी में PARIYAR के नाम से सर्च करने पर जानकारी सामने आती है।

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