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संस्कारों के कारण ही भारत सोने की चिड़िया था- स्वामी पुरुषोत्तमानंद सरस्वती

सप्तम विश्व बैदिक सम्मेलन संतों का समागम...
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उन्नाव

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Nitin Srivastva

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Updated: 19 Feb 2018, 2:04 PM IST

Swamy Purushottamananda Saraswati in Unnao UP hindi news

संस्कारों के कारण ही भारत सोने की चिड़िया था- स्वामी पुरुषोत्तमानंद सरस्वती

उन्नाव. सिर में लगी आंख लाेचन है आैर हृदय में लगी आंख विलाेचन है। अर्थात विशेष आंख है। उपनयन वेद है, आत्मा काे देखने के लिए गीता, वेद, पुराण, उपनिसद आदि धर्म ग्रंथों का याेग आचार्याें के जरिए अध्ययन जरूरी है। इन्हें जीवन में उतारकर ही श्रेष्ठता काे प्राप्त किया जा सकता है। बैसवाडा ब्राम्हण उत्थान समिति के तत्वावधान में एम जी कालेज आफ साइंस आर्ट एंड कल्चर छांछीराईखेडा में आयोजित सप्तम विश्व वैदिक सम्मेलन में सीतापुर से आये स्वामी पुरूषाेत्तमानंद सरस्वती ने उक्त विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि उपनयन वह आंखे जिससे आत्मा व परमात्मा काे देखा जा सके। जिस तरह आइने के बिना अपना चेहरा नही देखा जा सकता। उसी तरह विशेष नयन के बिना आत्मा काे नही देखा जा सकता है। उन्हाेने कहा कि ब्रम्ह विद्या के समान काेई विद्या नही है आैर परमात्मा सभी के हृदय में विद्यमान है। इस देश में पहले चालीस संस्कार हुआ करते थे। उन संस्काराें की बदाैलत ही भारत साेने की चिडिया था। भारतीय संस्कृति पहले तप की है। फिर गृहस्थ में जाने की है। उपनयन का अर्थ ज्ञान भी है।

पुरुषों में सोलह संस्कार

विश्व बैदिक सम्मेलन में उज्जैन के उपनिषद आश्रम से आए महंत स्वामी वीतरागानंद सरस्वती ने कहा कि पुरूषाें के साेलह संस्कार हाेते हैं। जबकि महिलाओं का केवल एक अर्थात विवाह संस्कार हाेता है। एक नारी के साथ जीवन यापन करने वाला ब्रम्हचारी आैर एक पति में श्रद्धा रखने वाली सती होती है। उन्हाेने कहा कि वेदाे में अस्सी प्रतिशत कर्म कांड, साेलह प्रतिशत उपासना आैर चार प्रतिशत ज्ञान है। हिन्दुत्व आैर संस्काराें की रक्षा करेंगे तभी ब्राम्हण बचेगा। इस मौके पर उन्होंने गायत्री मंत्र के विराट स्वरूप की भी व्याख्या की।स्वामी वीतरागानंद ने कहा कि अन्त:करण में स्थित आत्मा ही सत्य है आैर सत्य की उपासना करने वाला ही ब्रम्ह है।

सियाराम पांडेय शान्त काे पंडित प्रताप नारायण मिश्र पत्रकारिता पुरस्कार

कार्यक्रम के संचालक डां लक्ष्मीकांत पांडेय ने यज्ञोपवीत धारण करने वाले बटुकाें काे उठने जागने आैर श्रेष्ठ ज्ञान काे धारण करने का मंत्र दिया। कार्यक्रम में बैसवाडा ब्राम्हण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशाेक पांडेय ने भी संबोधित किया। इस मौके स्वामी वीतरागानंद सरस्वती ने विष्णुदत्त शुक्ल, गणेश प्रसाद शुक्ल, रामप्रसाद अवस्थी आैर हरिनाथ द्विवेदी काे विद्यारत्न, सियाराम पांडेय शांत काे प्रताप नारायण मिश्र पत्रकारिता पुरस्कार डां बद्रीनारायण तिवारी, दिनेश प्रसाद अवस्थी, अनूप त्रिवेदी, कमलेश शुक्ल काे ब्राम्हण गाैरव पुरस्कार से अलंकृत किया। इससे पूर्व नैमिषारण्य से पधारे यज्ञाचार्य पंडित शिवश्याम वेदाचार्य, पंडित अशाेक द्विवेदी, पंडित आशुतोष शामवेदी, ब्रम्हावर्त धाम के आचार्य पंडित कालीदास तिवारी ने बत्तीस बटुकाें का विधि विधान के साथ यज्ञोपवीत संस्कार कराया आैर उन्हे गायत्री मंत्र की दीक्षा दी। इस अवसर पर संतोष पांडेय, डां बालगाेविन्द द्विवेदी, डा मनाेज पांडेय, शैलेन्द्र त्रिपाठी आनंद माेहन द्विवेदी, चन्दिका प्रसाद मिश्र, नीरज बाजपेयी, अरूण दीक्षित, संजय शुक्ला काफी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद थे।

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