
अक़बर इलाहाबादी
अकबर इलाहाबादी आज के दिन यानी 16 नवंबर 1884 को इलाहाबाद में पैदा हुए थे। अकबर इलाहाबादी की शायरी उर्दू-हिन्दी जानने वालों के बीच खूब पढ़ी जाती है। अकबर इलाहाबादी बातों-बातों के बीच में ऐसा शेर कह देने के लिए भी मशहूर थे कि सामने वाले को कुछ कहते ना बनता था।
अकबर इलाहाबादी के घर पहुंचीं थी गौहर जान
अकबर इलाहाबादी की शायरी पढ़कर उस वक्त की मशहूर तवायफ गौहर जान का उनसे मिलने का दिल हुआ। गौहर जान अकबर इलाहाबादी उसने मिलने पहुंच गई लेकिन जो शेर उनको अकबर इलाहाबादी से सुनने को मिला, उसने उनके चेहरे को शर्म से लाल कर दिया। आइए बताते हैं क्या था पूरा किस्सा-
कलकत्ता की मशहूर तवायफ और बाद में डांस और गायिका के तौर पर देशभऱ में मशहूर हुईं गौहर जान इलाहाबाद आई हुई थीं। वो इलाहाबाद में जानकी बाई तवायफ के मकान पर ठहरी। गौहर जान ने अकबर इलाहाबादी को पढ़ रखा था तो जानकी बाई से कहा कि वो अकबर इलाहाबादी से मिलना चाहती है
जानकी बाई ने तांगा मगाया और दोनों अकबर इलाहाबादी के घर ज पहुंचीं। जानकी बाई पहले भी अकबर इलाहाबादी से मिली थीं। उन्होंने ही परियत कराते हुए बताया कि ये गौहर जान हैं। कलकत्ते में बेहद मशहूर हैं। आपसे मिलने की ख्वाहिश थी तो मैं यहां ले आई।
अकबर इलाहाबादी मुस्कुराए और बोले- "ना मैं कोई इमाम या वली नहीं कि लोग मुझसे मिलने की ख्वाहिश लेकर आएं। पहले जज सैयद अकबर हुसैन था। रिटायर होने के बाद सिर्फ अकबर रह गया हूं। आप आई हैं तो समझ नहीं आता कि कैसे आपकी खिदमत करूं। आपको तोहफा तो मैं क्या दूंगा, एक शेर बतौर यादगार लिख देता हूँ। अकबर इलाहाबादी ने पर्चे पर शेर लिखा। शेर कुछ यूं है-
ख़ुशनसीब आज भला कौन है गौहर के सिवा
सब कुछ अल्लाह ने दे रखा है शौहर के सिवा।
[अकबर इलहाबादी का ये किस्सा रेख्ता से लिया गया है ]
Updated on:
16 Nov 2022 07:52 pm
Published on:
16 Nov 2022 01:34 pm
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