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सीएम योगी बोले- अहिल्याबाई की टूटी मूर्तियों का वीडियो AI से बना, यह विपक्षियों की साजिश

CM Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री ने आगे कहा, 'काशी अविनाशी है। हर भारतीय के मन में काशी के प्रति गहरी आस्था है, लेकिन स्वतंत्र भारत में जिस व्यापक विकास और सम्मान की काशी को आवश्यकता थी, वह लंबे समय तक नहीं मिल पाया।

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सीएम योगी ने काशी में मंदिर टूटने पर दिया बयान, PC- IANS

वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर रानी अहिल्याबाई की मूर्ति टूटने के विवाद को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रेस कांफ्रेंस की। इसके लिए सीएम ने कांग्रेस को दोषी ठहराया और कहा टूटी हुई मूर्ति AI जेनरेटेड है। यह कांग्रेस की काशी को बदनाम करने की साजिश है।

सीएम ने आगे कहा, 'मंदिर तोड़े गए हैं, इससे ज्यादा बड़ा झूठ नहीं हो सकता। अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को संरक्षित किया गया है। जब जीर्णोद्धार का काम पूरा हो जाएगा, तब प्रतिमा नई तरह से दिखेगी। कांग्रेस मंदिर तोड़ने के AI ‌वीडियो से जनता को गुमराह कर रही, यह अपराध है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, 'काशी अविनाशी है। हर भारतीय के मन में काशी के प्रति गहरी आस्था है, लेकिन स्वतंत्र भारत में जिस व्यापक विकास और सम्मान की काशी को आवश्यकता थी, वह लंबे समय तक नहीं मिल पाया। पिछले 11–11.5 वर्षों में काशी ने अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए भौतिक विकास के नए शिखर छुए हैं।'

दुनिया के सामने प्रस्तुत होगा काशी का नया स्वरूप

उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि काशी का प्रतिनिधित्व देश की संसद में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने शुरू से ही यह स्पष्ट किया कि काशी के प्राचीन स्वरूप को संरक्षित रखते हुए उसे देश और दुनिया के सामने नए रूप में प्रस्तुत किया जाए। इसी सोच के तहत काशी के विकास की योजनाएं धरातल पर उतारी गईं।

अब 1.25 लाख से 1.50 लाख श्रद्धालु करते हैं दर्शन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि वर्ष 2014 से पहले या काशी विश्वनाथ धाम के विकास से पूर्व प्रतिदिन केवल 5 हजार से 25 हजार श्रद्धालु ही दर्शन के लिए आते थे। आज यही संख्या बढ़कर प्रतिदिन 1.25 लाख से 1.50 लाख तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि काशी ने अकेले ही देश की जीडीपी में लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले खेल और खेल प्रतियोगिताएं सरकार के एजेंडे में प्राथमिकता नहीं थीं। अंतरराष्ट्रीय स्तर के बुनियादी ढांचे के अभाव में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी या तो पलायन कर जाते थे या हताश हो जाते थे। लेकिन 2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में जो नई खेल संस्कृति विकसित हुई है, वह आज सभी के सामने है।