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बरेली: ‘जसमा ओढ़न’ नाटक का मंचन शुरू, 14 जुलाई तक देख सकेंगे आप

बरेली। दया दृष्टि चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में रंग विनायक रंगमंडल के नए नाटक ‘जसमा ओढ़न’ का मंचन विंडरमेयर थिएटर में आज से शुरू हो गया। पहले दिन पहला शो हाउसफ़ुल रहा। अब 14 जुलाई तक प्रतिदिन शाम 6.30 बजे इस नाटक का मंचन होगा। निर्देशक का परिचयसुशील शर्मा वरिष्ठ रंगकर्मी हैं। उन्होंने अब तक […]

बरेलीJul 11, 2024 / 04:54 pm

Avanish Pandey

बरेली। दया दृष्टि चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में रंग विनायक रंगमंडल के नए नाटक ‘जसमा ओढ़न’ का मंचन विंडरमेयर थिएटर में आज से शुरू हो गया। पहले दिन पहला शो हाउसफ़ुल रहा। अब 14 जुलाई तक प्रतिदिन शाम 6.30 बजे इस नाटक का मंचन होगा।
निर्देशक का परिचय
सुशील शर्मा वरिष्ठ रंगकर्मी हैं। उन्होंने अब तक दर्जनों नाटक किए हैं। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एन.एस.डी.) के लिए भी उन्होंने कई नाटक बनाए हैं। हाल ही में वह एन.एस.डी. की चयन समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। वह रंग विशारद थिएटर क्लब के मुखिया हैं। दया दृष्टि चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. बृजेश्वर सिंह के आग्रह पर वरिष्ठ रंगकर्मी सुशील शर्मा ने रंग विनायक रंगमंडल के कलाकारों के साथ ‘जसमा ओढ़न’ नाटक तैयार किया है।
नाटक का सार
‘जसमा ओढ़न’ एक पौराणिक कथा पर आधारित है। अप्सरा कामकुण्डला ने इंद्र देव के कहने पर नाला ऋषि की तपस्या भंग कर दी है। ऋषि उसे श्राप देते हैं कि अब वह पृथ्वीलोक पर जन्म लेगी। बदले में अप्सपा भी श्राप देती है कि पृथ्वीलोक पर वही ऋषि उसके पति होंगे। दोनों के श्राप साकार होते हैं। अप्सरा अब जसमा के रूप में जन्म लेती है और ऋषि का जन्म ओढ़ जाति में होता है। इस जन्म में ऋषि का नाम रूपा और अप्सरा का नाम जसमा है। दोनों का विवाह होता है।
रूपा तालाब और झीलें खोदने का काम करता है। वह सहस्रलिंग ताल खोदने जाता है, जहाँ राजा सिद्धराज जसमा को देखकर उस पर मोहित हो जाता है। वह जसमा से विवाह करना चाहता है। इनकार से क्रोधित राजा सहस्रलिंग खोदने वाले रूपा की हत्या कर डालता है। जसमा भी रूपा की चिता के साथ राख हो जाती है। जसमा के श्राप के कारण सहस्रलिंग ताल हमेशा के लिए सूखा रह जाता है और राजा को भी कभी संतान नहीं होती।
मंच पर इन कलाकारों ने निभाई भूमिका
इस नाटक में अजय चौहान ने नायक, हिमांशु गंगवार ने रंगला, आशी ने नीलम परी व भली, सिद्धी ने लीलम परी व ग्रामीण महिला, रिया ने अप्सरा व ग्रामीण महिला, समयुन खान ने कामकुण्डला व जसमा ओढ़न, दानिश खान ने नाला ऋषि व रूपा, विजय ने इंद्रदेव व ग्रामीण, शोभित गंगवार ने दला, शुभा भट्ट भसीन ने दली, मुनीष ने भला, अभिषेक ने पंडित व ग्रामीण, स्पर्ष ने बरोट व ग्रामीण, आयुष ने दूधमल व ग्रामीण, क्षितिज ने राजा सिद्धराज की भूमिकाएं निभाई हैं।
लव तोमर स्टेज मैनेजर तथा कपिल पाल सहायक निर्देशक हैं। अनिल कुमार मिश्रा ने सारंगी, राजेश कुमार पाठक ने हारमोनियम, शैलेंद्र सिंह चौहान ने ढोलक व पखावज पर अपना हुनर दिखाया है। कोरियोग्राफी ऋतिक की है। भ्रमोरी रॉय ने पोस्चर और बॉडी मूवमेंट, रूपेश भीमता ने लाइट डिजाइन किया है।

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