
पाकिस्तान के सिंध और मुल्तान में ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की संपत्ति। फोटो सोर्स- (Image Instagrammed by banke bihari_vrindavan)
Banke Bihari Temple Property In Pakistan: ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की संपत्तियां सिर्फ देश के विभिन्न राज्यों में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी फैली हुई हैं। बताया जाता है कि पाकिस्तान में भी ठाकुर बांकेबिहारी जी से जुड़ी संपत्तियां मौजूद हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने राजस्थान के कोटा में मंदिर की करीब 15 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की है, जिससे देश के अन्य राज्यों में फैली संपत्तियों के संरक्षण की उम्मीद भी मजबूत हुई है।
समिति ने अब विभिन्न राज्यों में स्थित मंदिर की संपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए जिलाधिकारियों के माध्यम से पत्राचार जल्द शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की सभी संपत्तियों की पहचान कर उनका संरक्षण किया जा सके और किसी भी तरह की अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। पाकिस्तान के सिंध और मुल्तान में ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की संपत्ति हैं।
ठाकुर बांकेबिहारी के भक्त सदियों से अपने आराध्य की सेवा में तन, मन और धन से समर्पित रहे हैं। मंदिर की स्थापना के समय भरतपुर के महाराजा ने अपना बगीचा दान में देकर इस पवित्र धाम की नींव रखी थी। इसके अलावा किशोरपुरा क्षेत्र में लगभग 500 वर्ग गज का एक भूखंड भी करीब 5 दशक पहले एक श्रद्धालु द्वारा मंदिर को दान किया गया था।
मंदिर के सेवायत प्रह्लादवल्लभ गोस्वामी के मुताबिक, ठाकुर बांकेबिहारी के नाम पर सिर्फ वृंदावन ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों के साथ पाकिस्तान में भी बड़ी मात्रा में संपत्तियां दर्ज हैं। मंदिर के सेवायत प्रह्लादवल्लभ गोस्वामी ने कहा कि यह भक्तों की गहरी आस्था और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का प्रतीक मानी जाती हैं।
मंदिर के सेवायत प्रह्लादवल्लभ गोस्वामी के मुताबिक, ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि ठाकुर बांकेबिहारी जी की सेवा में उनके प्राकट्य काल से लेकर अब तक बड़ी संख्या में चल और अचल संपत्तियां भेंट और दान के रूप में प्राप्त हुई हैं। इन दानदाताओं में ना केवल हिंदू राजा-महाराजा शामिल रहे, बल्कि मुस्लिम नवाबों के नाम भी दर्ज हैं।
| वर्ष | दानदाता | दान की गई संपत्ति |
|---|---|---|
| 1592 | सवाई महाराजा मानसिंह (जयपुर) | लगभग 3 एकड़ भूमि |
| 1594 | मुगल सम्राट अकबर | वृंदावन व राधाकुंड में 25 बीघा जमीन |
| 1595 | संत हरिराम व्यास | किशोरपुरा में एक भूखंड |
| 1596 | मित्रसेन कायस्थ व बिहारिनदास | बिहारिनदेव टीला वाली भूमि |
| 1748 | सवाई महाराजा ईश्वरी सिंह (जयपुर) | 1.15 एकड़ भूमि |
| 1769 | भरतपुर व करौली सरकार | भूमि दान |
| 1780 | विंध्याचल राजपरिवार | भूमि और बहुमूल्य आभूषण |
| 1785 | ग्वालियर रियासत | भूमि, भवन और आभूषण |
| 1960 | राजस्थान का एक भक्त परिवार | कोटा में 90 बीघा जमीन |
प्रह्लादवल्लभ गोस्वामी का कहना है कि दिल्ली के फराशखाने में मंदिर, भवन, वर्तमान पाकिस्तान के मुल्तान, शक्कर सिंध और सियालकोट में मंदिर-हवेली काफी पुरानी हैं। उन्होंने कहा कि इसका उल्लेख प्रबंध कमेटी द्वारा प्रकाशित श्रीस्वामी हरिदास अभिनंदन ग्रंथ, केलिमालजु, कृपा कोर, कथा हरिदासबिहारी की, मथुरा ए डिस्ट्रिक्ट मेमोयर और ब्रजभूमि इन मुगल टाइम्स में है।
Updated on:
21 Jan 2026 12:35 pm
Published on:
21 Jan 2026 12:35 pm
