22 मार्च 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अब लापरवाही पड़ेगी भारी, ट्रांसफार्मर फुंका तो इंजीनियर देंगे पैसा, प्रदेश में नया नियम लागू

उत्तर प्रदेश में ट्रांसफार्मर जलने पर अब संबंधित अभियंताओं से मरम्मत खर्च वसूला जाएगा। UPPCL ने नए नियम लागू कर जिम्मेदारी तय कर दी है।

2 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Anuj Singh

Mar 22, 2026

4 power transformers

Photo- Patrika

Lucknow News: उत्तर प्रदेश में ट्रांसफार्मर जलने पर अब अभियंताओं की सख्त जिम्मेदारी तय की गई है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने सभी डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनियों) के प्रबंध निदेशकों को नए निर्देश जारी किए हैं। ट्रांसफार्मर के जलने या खराब होने पर मरम्मत का खर्च संबंधित अभियंताओं से वसूला जाएगा। यह फैसला ट्रांसफार्मरों को नुकसान से बचाने और लापरवाही रोकने के लिए लिया गया है।

ट्रांसफार्मर जलने पर जिम्मेदारी और वसूली

डॉ. आशीष गोयल ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ट्रांसफार्मर जलने पर अभियंता जिम्मेदार होंगे। मरम्मत पर होने वाला पूरा खर्च उनसे रिकवर किया जाएगा। क्षमता के आधार पर वसूली का प्रतिशत अलग-अलग तय किया गया है:-

  • 10 kVA से 63 kVA तक के ट्रांसफार्मर: अगर ट्रांसफार्मर जलता है तो अवर अभियंता (जूनियर इंजीनियर) से 50 प्रतिशत, उपखंड अधिकारी (एसडीओ) से 30 प्रतिशत और अधिशासी अभियंता (एक्सई) से 20 प्रतिशत राशि वसूल की जाएगी।
  • 100 kVA से 250 kVA तक के ट्रांसफार्मर: यहां अवर अभियंता से 40 प्रतिशत, उपखंड अधिकारी से 40 प्रतिशत और अधिशासी अभियंता से 20 प्रतिशत वसूली होगी।
  • 400 kVA से 1000 kVA तक के ट्रांसफार्मर: इस बड़े आकार के ट्रांसफार्मर पर अवर अभियंता से 30 प्रतिशत, उपखंड अधिकारी से 30 प्रतिशत, अधिशासी अभियंता से 30 प्रतिशत और अधीक्षण अभियंता (एसई) से 10 प्रतिशत की रिकवरी की जाएगी।

यह वसूली लापरवाही या गलत देखभाल के कारण होने वाले नुकसान के लिए है। इससे अभियंताओं को और सतर्क रहने के लिए मजबूर किया जाएगा।

वसूली के लिए प्रक्रिया

संबंधित सक्षम अधिकारी द्वारा नियम-10 के तहत नोटिस जारी किया जाएगा। नोटिस मिलने के बाद अभियंताओं को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। जांच के बाद तय राशि उनकी सैलरी से काटी जा सकती है या अन्य तरीके से वसूल की जाएगी। यह कदम ट्रांसफार्मरों की देखभाल में लापरवाही बर्दाश्त न करने का संकेत है।

सुरक्षा उपकरण अनिवार्य

सभी डिस्कॉम को निर्देश दिए गए हैं कि हर ट्रांसफार्मर पर 100 प्रतिशत फ्यूज सेट या टेललेस यूनिट लगाई जाए। ये उपकरण ओवरलोडिंग या शॉर्ट सर्किट से ट्रांसफार्मर को बचाते हैं। साथ ही नियमित जांच, तेल का स्तर चेक करना और लोड मैनेजमेंट पर जोर दिया गया है। ट्रांसफार्मर को डैमेज से बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने को कहा गया है। यह निर्देश हाल ही में जारी किए गए हैं, क्योंकि पिछले समयों में ट्रांसफार्मर जलने की घटनाएं आम थीं, जिससे लोगों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ता था। अब जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है। इससे बिजली आपूर्ति बेहतर होगी और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। अभियंताओं को अब और जिम्मेदारी से काम करना होगा, ताकि ट्रांसफार्मर सुरक्षित रहें और मरम्मत का बोझ सरकार या उपभोक्ताओं पर न पड़े।