
सहारनपुर से लोकसभा प्रत्याशी माजिद अली की फाइल फोटो
बसपा सुप्रीमों मायावती ने सहारनपुर से हाथी के निशान पर लोकसभा चुनाव लड़े माजिद अली को पार्टी से बाहर कर दिया है। माजिद अली पर संगठन विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप लगे हैं। चर्चाएं हैं कि उनपर भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का भी आरोप है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं है लेकिन राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा है कि उन पर ये आरोप भी लगे हैं। फिलहाल माजिद अली का यही कहना है कि उनसे क्या भूल हुई है उन्हे इसकी जानकारी नहीं है। उन्हे पार्टी से क्यों निकाला गया इस बारे में उन्हे कोई जानकारी नहीं है। माजिद अली ने कहा है कि मायावती उनकी नेता हैं और रहेंगी।
माजिद अली सहारनपुर लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ते हुए दो लाख वोट भी नहीं ले पाए। ऐसा पहली बार हुआ जब बसपा के सिंबल पर चुनाव लड़ने वाले लोकसभा प्रत्याशी को इतने कम वोट मिले हों। चुनाव प्रचार के दौरान से ही माजिद अली के बारे में चर्चाएं होने लगी थी कि वो चुनाव को लेकर गंभीर नहीं हैं। नतीजे आने तक माजिद अली अपनी जीत का दावा कर रहे थे लेकिन उन्हे इतनी बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ेगा ये उन्होंने सोचा नहीं था। अब दो लाख वोट भी नहीं मिलने पर माना जा रहा था कि मायावती उन्हे तलब करेंगी लेकिन बसपा सुप्रीमों ने उन्हे पार्टी से बाहर का ही रास्ता दिखा दिया।
माजिद अली और बसपा का नाता नया नहीं है। उनकी पत्नी तस्मीम बानो ने वर्ष 2016 में बहुजन समाज के सिंबल पर ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था और जीत हांसिल की थी। इस जीत के बाद माजिद पांच साल तक बसपा में रहे। 2021 के जिला पंचायत चुनाव के दौरान उन्होंने पलटी मारी और 16 सितंबर 2021 को नोएडा में आयोजित एक कार्यक्रम में आजाद समाज पार्टी ज्वाइन कर ली। उस समय उन पर आरोप लगे थे कि बसपा से दोबारा टिकट नहीं मिलने के चलते ये कदम उठाया है। इसके बाद तीन दिसंबर 2023 में वो फिर से हाथी पर सवार हो लिए थे।
Updated on:
06 Jun 2024 08:53 pm
Published on:
06 Jun 2024 08:52 pm
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