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कौन हैं पसमांदा मुस्लिम, क्या मुस्लिमों पर बीजेपी ने मास्टर स्ट्रोक लगा दिया है?

बीजेपी ने पसमांदा मुस्लिमों को अपने पाले में लाने के लिए लखनऊ में मुस्लिम बुद्धिजीवियों का सम्मेलन किया। कोन हैं ये? बीजेपी इन मुसलमानों पर क्यों दांव लगा रही है? आइए जानते हैं इसके बारे में सब कुछ…

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Anand Shukla

Oct 19, 2022

Brajesh Pathak attend to pasmada Sammelan

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 16 अक्टूबर को बीजेपी ने पसमांदा मुसलमानों का सम्मलेन किया। इस सम्मेलन में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, केशव प्रसाद मौर्या ने मुलमानों पर खूब बातें कीं। ब्रजेश पाठक ने कहा कि देश में राजनीतिक पार्टियों ने पसमांदा मुसलमानों को बिरयानी में पड़े तेजपत्ते की तरह इस्तेमाल किया, खाया और फेंक दिया।

दरअसल पिछले महीने जब हैदराबाद में बीजेपी की कार्यकारिणी बैठक हुई तब पीएम मोदी ने बीजेपी पदाधिकरियों से पसमांदा मुसलमानों को जोड़ने को कहा था। इसके बाद सबसे पहले ये कवायद यूपी में शुरू हो गई है।

कौन हैं पसमांदा मुस्लिम ?

पसमांदा मुस्लिमों को जानने के लिए हमें सबसे पहले मु्स्लिम की जाति यानी वर्गीकरण को जानना होगा। देखिए, भले इस्लाम जाति का विरोध करता हो, लेकिन भारत में मुस्लिमों का 3 वर्गीकरण है।

अशराफ
अजलाफ
अरजाल

पहली, अशराफ यानी बड़ी जातियां

खान, पठान, सैयद, मुगल, शेख और मिर्जा। यह जातियां संपन्न में होती हैं। अमूमन इन्हें भेदभाव नहीं झेलना पड़ता।

दूसरी अजलाफ यानी मिडिल क्लास वाली जातियां
रईनी और मोमिन। रईनी वे लोग होते हैं जो सब्जी बेचते हैं। मोमिन बुनकरों को कहते हैं।

अब बची तीसरी जातियां अरजाल, यानी कमजोर वर्ग

इस वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े होते हैं। इनमें साफ-सफाई, बाल काटने, चप्पल-जूते सिलने, चमड़े से जुड़े काम करने वाले होते हैं। इन्हीं जातियों को पसमांदा मुसलमान कहा जाता है।

पसमांदा फारसी शब्द है जिसका अर्थ है…
पसमांदा यानी जो पीछे रह गए हैं। यह इस्लाम में उनके लिए इस्तेमाल किया जाता है जो पिछड़े और दलित जातियों से हैं।

देश में पिछड़े, दलित और आदिवासी मुस्लिम समुदाय अब पसमांदा की पहचान के तहत संगठित हो रहे हैं।इसके अलावा पसमांदा एक संगठन भी है

इस संगठन की स्थापना पटना में में अली अनवर ने 1998 में की थी। अनवर अंसारी जाति के पिछड़े मुसलमान हैं। उनका दावा था कि निम्न वर्ग के मुसलमानों पर उच्च वर्ग के अशरफ मुसलमान जातिगत उत्पीड़न करते हैं। इसीलिए पसमांदा संगठन बनाया है।

इन्हीं समुदाय के लोगों को जोड़ने के लिए बीजेपी ने कवायद शुरू कर दी है। इसकी शुरुआत यूपी के लखनऊ से हुई। बीते करीब एक साल से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS और बीजेपी के बड़े नेता मुस्लिम समुदाय के नेताओं से मिल रहे हैं।

यूपी से ही क्यों शुरू हुआ पसमांदा मिशन

हमारे यहां आखिरी बार जनगणना 2011 में हुई थी। इसीलिए तब के आंकड़े बताने पड़ रहे हैं। इसके बाद कोई विश्वनीय आंकड़ा नहीं मिला। तब यूपी में इस्लाम दूसरा सबसे बड़ा धर्म था। करीब 19.26% लोग यूपी में इसे मानते हैं।

इस बात का कोई आधिकारिक डाटा तो नहीं मिलता, लेकिन मुस्लिम स्कॉलर्स का कहना है कि यूपी की करीब 80% मुस्लिम आबादी पसमांदा है। एक रिपोर्ट आई थी 2004 में, सच्चर कमेटी की। इसका दावा था कि पूरे देश में कुल मुस्लिम आबादी का 40% पसमांदा हैं।