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1000 साल पुरानी श्रीमद्भभागवत् गीता की पांडुलिपि एक क्लिक में

जानिए कहां रखी है यह अमिट स्यााही से लिखित श्रीमद्भागवत, और कौन-कौन सी हैं पांडुलिपियां...

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Ajay Chaturvedi

Jun 23, 2016

1000 years old manuscript

1000 years old manuscript

वाराणसी
. हजार साल पुरानी धर्मग्रंथों की पांडुलिपियों को छून में अब डर नहीं लगेगा कि कहीं इनका पन्ना दरक न जाए। कोई आपको इन्हें छूने से मना भी नहीं करेगा। यूं कहें कि पांडुलिपियों के पन्नों को छूने की जरूरत ही नहीं, बस एक क्लिक पर आपके स्क्रीन पर होंगी ये पांडुलिपियां। दुनिया के शीर्ष दस पांडुलिपि संग्रहालयों में शुमार काशी के सरस्वती पुस्तकालय में रखी इन पांडुलिपियों को ऑनलाइन करने का काम लगभग पूरा हो चुका है। इसी में एक है एक हजार साल पुरानी पांडुलिपि श्रीमद्भागवत् गीता।


देश की अमूल्य धरोहर है सरस्वती लाइब्रेरी
देशभर में पांडुलिपियों के संग्रहालय तो दौ सौ से ज्या दा हैं पर संपूर्णानंद संस्कृ त विश्वभविद्यालय की सरस्वेती लाइब्रेरी अनूठी-अमूल्यस धरोहर के चलते आकर्षण का केन्द्रप है। यहां एक लाख दुर्लभ पांडुलिपियों का भंडार है। इतनी संख्या् में एक साथ पांडुलिपियां देश के बाहर गिनी-चुनी जगहों पर ही मिलेंगी। इन्हीं में से एक है एक हजार साल पहले भारत में बने हैंड मेड कागज पर लिखी पांडुलिपि। अमिट स्याइही के चलते सदियां बीतने के बाद भी देवनागरी लिपि में लिखी श्रीमदभागवत गीता को आज भी स्पइष्ट रुप से पढ़ा जा सकता है। स्वभर्ण पत्र पर अष्टीगंध से लिखावट और चित्रों में सोने से की गई महीन कारीगरी वाली पांडुलिपियां भारतीय सभ्याता-संस्कृपति के साथ कला का बेजोड नमूना है।


देश की अकेली पांडुलिपि है कामवाचः
सरस्वती पुस्तकालय में रखी पांडुलिपि कामवाचः देश की अकेली पांडुलिपि है। अद्भुत है यह पांडुलिपि। पतले स्वंर्ण पत्तर पर अष्टलगंध से बर्मी लिपि में लिखे शब्दु ऐसे उभरे हैं जैसे उन्हेंप जमाया गया हो। अथर्व वेद से संबंधित कपिष्ठप संहिता की भी कहीं दूसरी प्रति नहीं है। श्रीमद्भागवत गीता से जुड़ी रास पंचाध्यासयी में बने चित्रों में सोने के अद्भुत वर्क को मैग्नीैफाइंग ग्ला स से देखा जा सकता है।


वेद-वेदांत, कर्मकांड की अद्भुत पांडुलिपियों का है यहां संग्रह
पांडुलिपियां वेद, कर्मकांड, वेदांत, सांख्य योग, धर्मशास्त्र , पुराणेतिहास, ज्यो्तिष, मीमांसा, न्यानय वैशेषिक, साहित्यप-व्याककरण तथा आयुर्वेद विषयों से संबंधित हैं। हैंड मेड कागज के अलावा भोजपत्र, लाक्षपत्र, काष्ठ् पत्र और शिला पत्र पर पांडुलिपि प्राचीन देवनागरी, बांग्लौ, उडि़या, मैथिली, गुरुमुखि, शारदा, अरबी-फारसी लिपी में लिखी हैं।


लाल पोटली में लिपटी रखी है यह पांडुलिप
सरस्वोती लाइब्रेरी अब तक आधुनिक व्यपवस्थाप से दूर रही। प्राचीनकाल की बड़ी-बड़ी आलमारियों में व्यावपारियों के बही-खाता की तरह लाल कपड़े की पोटली में पांडुलिपियां बांध कर रखी गई हैं। सुरक्षा की दृष्टि से सालभर में बमुश्किल सौ स्कॉालरों, खासकर विदेशियों को ही इसके अध्य यन की अनुमति विश्व विद्यालय प्रशासन से मिलती है।


इंदिरा गांधी राष्ट्री य कला केन्द्रम ने तैयार की डीवीडी
सरस्वाती पुस्तकालय के प्रभारी सूर्यकांत ने बताया कि प्लाडन के मुताबिक सभी एक लाख पांडुलिपियों की डीवीडी तैयार कराई गई है। यह काम इंदिरा गांधी राष्ट्री य कला केन्द्रड ने किया। 285 डीवीडी लाइब्ररी को मिलने से अब पांडुलिपियों का कैटलॉग ऑनलाईन किया जाएगा। इसे देख डिमांड के अनुसार ऑनलाईन पेमेंट पर पांडुलिपियां कंप्यूटर स्क्रीइन पर होगी। बस कुछ और संसाधन की जरुरत है जो जल्दे मिलने की उम्मी द है। ऑनलाईन होते ही रिसर्च स्कॉोलरों के साथ आमजन को भी दुर्लभ पांडुलिपियां देखने-पढ़ने का मौका मिलेगा।


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