
पूर्व काशिराज का महल (फाइल फोटो)
वाराणसी. पड़ोसी जिला चंदौली के चकिया इलाके की 58 बीघा जमीन जो राजा बनारस के नाम से दर्ज थी को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रेम प्रकाश मीणा ने सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने सोमवार को जारी अपने आदेश में पूर्व काशिराज स्व डॉ विभूति नारायण सिंह और कुंवर अनंत नारायण सिंह के नाम दर्ज जमीन को सरकारी संपत्ति घोषित करते हुए प्रदेश राजस्व अधिनियम 2006 की धारा 30 (1) के तहत निरस्त करते हुए समस्त भूमि को प्रदेश सरकार के अधीन कर दिया है। इस फैसले से नगर में बसे सैकड़ों परिवारों के विस्थापित होने का खतरा पैदा हो गया है।
जमीन पर है काली मंदिर और तालाब
बता दें कि ज्वाइंट मजिस्ट्रेट मीणा ने पांच मार्च 2022 को ही इस मामले में पहले से चल रहे मुकदमे पर फैसला सुरक्षित कर लिया था जिसे 14 मार्च को जारी किया। इस भूमि पर महारानी मां काली का ऐतिहासिक मंदिर व तालाब भी है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने अपने फैसले में कहा कि प्रदेश सरकार के नाम से दर्ज 58 बीघा (लगभग 15 हेक्टेयर) भूमि को 1426 से 1431 फसली में गलत इंद्राज के जरिए पूर्व काशी नरेश डॉ. विभूति नारायण सिंह व उनके पुत्र कुंवर अनंत नारायण सिंह के नाम से खतौनी में दर्ज कर लिया गया था।
भूमिधरों का नाम हटाकर प्रदेश सरकार का नाम दर्ज करने का आदेश
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में चकिया के ऐतिहासिक काली मंदिर, पोखरा काली मंदिर के नाम से दर्ज भीटा आबादी की जमीन, कालिका धाम कॉलोनी, ठाकुर बाग, चकरा बाग, बापू बाल विद्या मंदिर जूनियर हाई स्कूल, पुरानी सब्जी मंडी, भैसही के तिवारी जी का हाता सहित पूरी भूमि से भूमिधरों का नाम हटाकर प्रदेश सरकार का नाम दर्ज करने का आदेश दिया है। इस फैसले से नगर में पूर्व काशी नरेश के नाम से दर्ज भूमि के साथ ही जिन लोगों ने पूर्व काशी नरेश व उनके परिजनों से जमीन खरीदकर घर या दुकान बनवाया था, उनमें भी विस्थापन का खतरा बढ़ गया है।
Published on:
15 Mar 2022 01:21 pm

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