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सुनो आमिर खान,तुम्हारी माँ का बचपन यहाँ सिसक रहा है 

-आमिर खान के ननिहाल लालगंज चौहट्टे से लाइव

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Awesh Tiwary

Mar 14, 2016

aamir khan remembered mother hometown

aamir khan remembered mother hometown

-आवेश तिवारी
बनारस- नवाब कायम की बेवा कनीज फातिमा की आँखों में आंसू है, पेट में भूख और हाथों में हिंदी फिल्मों के सुपर स्टार आमिर खान की दी हुई सोने की अंगूठी। कनीज को अब तक याद है कि जब सात साल पहले आमिर खान अपने ननिहाल की तलाश में बनारस आये और नवाब कायम की बात अपनी अम्मी जीनत हुसैन से कराई तब उस वक्त आमिर और नवाब दोनों की आँखों से आंसू झलक पड़े थे,शायद दूसरी तरफ जीनत भी रो ही रहीं होंगी।आमिर खान को उनकी अम्मी के घर ख्वाजा मंजिल का पता बताने वाले नवाब कायम अब से दो साल पहले गरीबी और मुफलिसी में ही मर गए।
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इल्म हासिल करो माँ की गोद से
बनारस शहर की तंग और बदबूदार गलियों में से एक लालगंज चौहट्टे में आमिर खान का ननिहाल ख्वाजा अब पूरी तरह से जमींदोज हो चूका है ,कुछ मेहराबदार खिडकियों के अवशेष हैं कुछ लकड़ी की बल्लियाँ है कुछ बच्चे हैं जिनके लिए यह जगह अब खेल का मैदान है,कुछ लोग हैं जो कहते हैं यह जगह हम किसी को नहीं लेने देंगे। ख्वाजा मंजिल के सामने एक स्कूल है जिस पर लिखा हुआ है"इल्म हासिल करो माँ की गोद से लेकर कब्र की आगोश तक",चौहट्टे का नफीस कहता है चलो आमिर खान को अपनी माँ का ख्याल तो है ऊँचाइयों पर अक्सर लोग अपने माँ बाप का हाथ छोड़ देते हैं।
मीर कासिम के मोहल्ले की हैं जीनत हुसैन
मोहल्ले के मोड़ पर खलील अहमद के बेटे नफीस मिल जाते हैं। आमिर जब बनारस आये तो सबसे पहले नफीस से मिले थे,नफीस कहते हैं उनकी अम्मा जीनत ने उनको बता कर भेजा था कि मेरे घर के बगल में एक पंजाबी का घर और शिया की मस्जिद है,यह पता काम आया,आमिर को उनका ननिहाल मिल गया। आमिर के ननिहाल से महज 50 मीटर की दूरी पर बंगाल के नवाब मीर कासिम की बेवा की कब्र हैं,एक घर में खुदी इस कब्र पर अब नवाब कायम की बेवा फातिहा पढ़ती हैं । मोहल्ले वाले बताते हैं कि शहर का एकमात्र चौहट्टा यही है,चौहट्टा उस जगह को कहते हैं जहाँ से 6 रास्ते निकलते हैं ,इनमे से एक रास्ता आमिर की माँ के उस प्राइमरी स्कूल की ओर जाता है जहाँ उन्होंने अपने बचपन में पढ़ाई की।
ख्वाजा मंजिल पर आसान नहीं कब्ज़ा
ख्वाजा मंजिल के बारे में मोहल्ले वाले बताते हैं कि इस जगह पर चौहट्टे के पूर्व सभासद बद्रीनारायण का मालिकाना हक़ है,बद्रीनारायण की पत्नी शकुन्तला देवी बताती है कि हमारे ससुर चौथीलाल ने नीलामी में यह मकान ख़रीदा था, और अब हम किसी को नहीं बेचेंगे। लेकिन मोहल्ले का ही अब्दुल कयूम बद्रीनारायण के दावे को झूठ ठहराता है,उसके साथी अख्तर कहते हैं पिछले 40 सालों से तो ये मकान इसी हालत में हैं,हमें लगा था कि आमिर खान इस जमीन का कुछ करेंगे पर उन्होंने खबर नहीं ली,यह अच्छा है कि उन्हें अभी भी इसकी याद है।
बनारस को तुम्हारा इन्तजार है आमिर
चौहट्टे के दुकानदार वसीम अहमद जिनकी दूकान पर आमिर ने चाय पी है ठहाका लगाते हुए कहते हैं कि जब आमिर अपने ननिहाल का पता ढूंढते हुए यहाँ भेष बदलकर आये और हमसे कहा कि हम पाकिस्तान से आये हैं ,हम तो डर गए, बोले भाई जाओ,हम कहाँ से ढूंढें ख्वाजा मंजिल? वसीम कहते हैं कि अच्छी बात होगी वो इस जगह को आबाद कर दें।मोहल्ले के लोग बताते हैं कि बंटवारे के बाद आमिर के परिवार के कुछ लोग पाकिस्तान और कुछ लोग मुंबई चले गए थे ,यह ख्वाजा मंजिल दरअसल उनके नाना की निशानी है जिन्होंने मुग़ल-ए-आजम में एक किरदार अपनी आवाज दी थी।बनारस शहर के साथ –साथ लालगंज चौहट्टा भी आमिर के इन्तजार में है ,यह इस शहर की किस्मत है वो खुद को संवारने ,सजाने के लिए हमेशा अपने दरवाजे पर खड़ा किसी न किसी का इन्तजार करता रहता है7

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