मोहल्ले के मोड़ पर खलील अहमद के बेटे नफीस मिल जाते हैं। आमिर जब बनारस आये तो सबसे पहले नफीस से मिले थे,नफीस कहते हैं उनकी अम्मा जीनत ने उनको बता कर भेजा था कि मेरे घर के बगल में एक पंजाबी का घर और शिया की मस्जिद है,यह पता काम आया,आमिर को उनका ननिहाल मिल गया। आमिर के ननिहाल से महज 50 मीटर की दूरी पर बंगाल के नवाब मीर कासिम की बेवा की कब्र हैं,एक घर में खुदी इस कब्र पर अब नवाब कायम की बेवा फातिहा पढ़ती हैं । मोहल्ले वाले बताते हैं कि शहर का एकमात्र चौहट्टा यही है,चौहट्टा उस जगह को कहते हैं जहाँ से 6 रास्ते निकलते हैं ,इनमे से एक रास्ता आमिर की माँ के उस प्राइमरी स्कूल की ओर जाता है जहाँ उन्होंने अपने बचपन में पढ़ाई की।