
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा के रचयिता श्यामलाल गुप्त
वाराणसी. Azadi ka Amrit Mahotsav: यानी स्वतंत्रता के 75 साल। इन 75 सालों से हम देशवासी एक गीत हमेशा गुनगुनाते हैं। हर भारतवासी को इस गीत पर गुमान है। हो भी क्यों नहीं ऐसा गीत ही है ये जो हमारे तिरंगे की आन-बान और शान को वो सम्मान और ऊंचाई प्रदान करता है जिससे हर देशवासी को फक्र होता है।
3 मार्च 1924 को लिखा गया ये झंडा गीत
श्यामलाल गुप्त ने झंडा गीत 3 मार्च 1924 को लिखा था। उन्होंने इस गीत को पहली बार कानपुर के फूलबाग़ मैदान में जलियांवाला बाग़ के शहीदों की याद में जब गाया था, तब पं.जवाहरलाल नेहरु ने कहा था 'यह गीत अमर होगा"। आजादी के बाद इस गीत को लाल किले से भी गाया गया था और इसको ''झंडा गीत'' का नाम दिया गया।
आजादी की लड़ाई को उत्प्रेरित एवं उत्तेजित करने वाला गीत
आजादी की लड़ाई को उत्प्रेरित व उत्तेजित करने वाला है ये गीत। ये हमारा 'झंडा गीत' अथवा 'ध्वज गीत' रहा है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर रहे डॉ सतीश कुमार बताते हैं कि कानपुर के श्याल लाल गुप्त 'पार्षद' ने यह गीत जेल में लिखा था। वह जलियांवाला बाग़ हत्या कांड से बहुत आहत थे और उन शहीदों की याद में इस गीत की रचना की थी। उन्होंने जब पहली बार इस गीत की पंक्तियां पंडित जवाहर लाल नेहरु के सामने कानपुर के फूलबाग़ के मैदान में गाई थीं, तो पं. नेहरु ने उन्हें गले से लगा लिया था। स्व. गुप्त ने 1921 में संकल्प लिया था कि जब तक देश आजाद नहीं हो जाएगा तब तक नंगे पांव ही रहेंगे।
गणेश शंकर विद्यार्थी से मुलाकात के बाद श्यामलाल बने स्वतंत्रता सेनानी
प्रो सतीश कुमार बताते हैं कि श्यामलाल गुप्ता की मुलाकात जब क्रांतिकारी गणेश शंकर विद्यार्थी से हुई तो उसके बाद वह आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे। वह सचिव पत्रिका के संपादक भी थे। गांधी जी के नमक आन्दोलन, भारत छोड़ो आंदोलन समेत कई आंदोलनों में वह जेल गये और कांग्रेस के फतेहपुर जिलाध्यक्ष भी रहे। फतेहपुर की जेल में उन्हें अंग्रेजों ने 6 बार बंद किया था।
कांग्रेस के हर समारोह, सम्मेलन का सर्वमान्य गीत बन गया
कांग्रेस के सम्मेलनों और कांग्रेस सेवादल के शिविरों आदि के आरंभ में होने वाले ध्वजोत्तोलन के कार्यक्रमों की सुस्थापित पुरानी रवायत में, सविधि निर्मित ध्वज क्षेत्र में लाइन-अप होकर सबसे पहले सावधान के कमांडर के साथ राष्ट्रगीत वन्देमातरम का गान और उसके बाद क्रम से ध्वजोत्तोत्तोलन, झंडा गीत, तीन मिनट का अध्यक्षीय सम्बोधन और अंत में राष्ट्रगान एवं विसर्जन होता है।
झंडा गीत
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊंचा रहे हमारा।
सदा शक्ति बरसाने वाला,
प्रेम सुधा सरसाने वाला,
वीरों को हरषाने वाला,
मातृभूमि का तन-मन सारा।
झंडा ऊंचा रहे हमारा।।
कांपे शत्रु देखकर मन में...
स्वतंत्रता के भीषण रण में,
लखकर बढ़े जोश क्षण-क्षण में,
मिट जाए भय संकट सारा।
झंडा ऊंचा रहे हमारा।।
इस झंडे के नीचे निर्भय,
लें स्वराज्य यह अविचल निश्चय,
बोलें भारत माता की जय,
स्वतंत्रता हो ध्येय हमारा।
झंडा ऊंचा रहे हमारा।।
देश-धर्म पर बलि-बलि जाओ
आओ! प्यारे वीरो, आओ।
एक साथ सब मिलकर गाओ,
प्यारा भारत देश हमारा।
झंडा ऊंचा रहे हमारा।।
इसकी शान न जाने पाए,
चाहे जान भले ही जाए,
विश्व-विजय करके दिखलाएं,
तब होवे प्रण पूर्ण हमारा।
झंडा ऊंचा रहे हमारा।।
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊंचा रहे हमारा।
आजादी के बाद झंडा गीत में हुआ संशोधन
प्रो सतीश कुमार के अनुसार, आजादी के बाद श्यामलाल 'पार्षद' रचित पुराने झंडा गीत का संशोधन कर उसका 52 सेकेंड के गान के रूप में समसामयिक संशोधन के साथ संक्षिप्तीकरण किया गया और उसका रूप इस प्रकरण हो गया...
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊंचा रहे हमारा।
शान न इसकी जाने पाए,
चाहे जान भले ही जाए,
विश्व-शांति करके दिखलाये,
तब होवे प्रण पूर्ण हमारा।
झंडा ऊंचा रहे हमारा।।
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊंचा रहे हमारा।
सदा शक्ति सरसाने वाला,
प्रेम सुधा बरसाने वाला,
वीरों को हरषाने वाला,
मातृभूमि का तन-मन सारा।
झंडा ऊंचा रहे हमारा।
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊंचा रहे हमारा।
Published on:
13 Aug 2022 11:03 am

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