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इस बाहुबली की मां ने जनता से कहा, एक वोट से मेरे बेटे को ‘जीवन दान’ दे दीजिए और बेटा विधायक बन गया

विधायक और सांसद बनकर राजनीति में एक बड़ा मुकाम बनाया

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इस बाहुबली की मां ने जनता से कहा, एक वोट से मेरे बेटे को 'जीवन दान' दे दीजिए, और बेटा विधायक बन गया

वाराणसी. यूपी में ऐसे कई धुरंधर निकले जिनकी राजनीति में दावेदारी बड़ी ही दिलचस्प रही। ऐसा ही एक नाम है धनंजय सिंह का। जो पहली बार मां लालती देवी के चुनाव प्रचार की बदौलत विधायक बने, उसके बाद भी विधायक और सांसद बनकर राजनीति में एक बड़ा मुकाम बनाया।

जी हां 2002 में यूपी में विधान सभा के चुनाव होने थे। कई आपराधिक मामलों में झांसी जेल में बंद धनंजय सिंह ने भी राजनीतिक पारी खेलने का मन बनाया। सपा के कब्जे वाली इस सीट पर किसी ब्राह्मण या ठाकुर उम्मीदवार का जीत पाना सपने के समान था। इसके बावजूद भी धनंजय सिंह ने चुनाव लड़ने के लिए अनुमति ली और जेल से आकर नामांकन किया।

सपा के पूर्व मंत्री, तत्कालीन विधायक और पार्टी की तरफ से उम्मीदवार श्री राम यादव की यहां काफी लोकप्रिय थे। यादव बाहुल्य इलाका होने के कारण श्री राम के खिलाफ किसी निर्दल उम्मीदवार का चुनाव मैदान में होना कोई चुनौती नहीं मानी जा रही थी। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आए लड़ाई का रूख बदलने लगा।

बसपा उम्मीदवार ने बढ़ाई सपा की मुसीबत

सपा के श्री राम यादव अपनी जीत पक्की मान रहे थे, इस बीच बसपा ने राम कुमार यादव को मैदान में उतार कर उनकी लड़ाई को कमजोर बना दिया। यादव बिरादरी के दो उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से बाहुल्य मतदाता दो खेमें में बंट गए। इसका फायदा निर्दल उम्मीदवार धनंजय सिंह को मिलने लगा। सवर्ण मतदाताओं के वोट धनंजय सिंह की तरफ एकजुट होने लगे। जब यादव मतदाताओं को लगा कि हमारे बंट जाने से धनंजय सिंह चुनाव जीत सकते हैं, उधर बड़ी-बड़ी पंचायतें होनें लगी। काफी हद तक यादव बिरादरी श्री राम यादव के पक्ष में एकजुट हो गई।

मां ने मांगा वोट और बेटा बन गया विधायक

जब धनंजय सिंह की मां ने देखा कि मुकाबले में सपा के श्री राम यादव बेटे धनंजय को पटखनी दे सकते हैं वो खुद जनता के बीच पहुंच गईं। रारी के गांव-गांव में जाकर बेटे के लिए वोट मांगा। कहा कि आप एक वोट से मेरे बेटे को जीवन दान दे दीजिए। उसे जन प्रतिनिध बनाकर अपना मान लीजिए। मां की अपील इस तरह जनता में पहुंची कि लोगों ने जीवनदान के रूप में वोट दिया और धनंजय सिंह विधायक बन गये। लेकिन विधायक बनने के बाद लालती देवी की निधन हो गया। धनंजय सिंह का राजनीतिक सफर जारी रहा। 2007 में वो इसी सीट से दोबार विधायक बने। 2009 में बसपा के टिकट पर जौनपुर सदर सीट से सांसद भी बने। इस तरह से 2002 में मां की एक अपील ने धनंजय की राजनीतिक नींव मजबूत कर दिया।

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