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बनारस बना हेल्थ हब, अब ब्लड कैंसर के बेहतर इलाज की भी मिली सुविधा

बनारस एक तरह से हेल्थ हब के रूप में तैयार हो चला है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल चिकित्सालय को एम्स का दर्जा मिल चुका है। ट्रामा सेंटर, दंत चिकित्सा, नेत्र चिकित्सा के बड़े संस्थान तो हो ही गए हैं। टाटा का कैंसर अस्पताल है। अब इसी होमी भाभा कैंसर अस्पताल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी शुरू हो गई है। ये बनारस ही नहीं पूरे पूर्वांचल के लिए बड़ी नए साल में बड़ी सहूलियत वाली सुविधा होगी।

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होमी भाभा कैंसर अस्पताल

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वाराणसी. बनारस धीरे-धीरे चिकित्सा का हब बन चुका है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल चिकित्सालय को एम्स का दर्जा मिल चुका है। वहां अत्याधुनिक सुविधाओं वाला ट्रामा सेंटर है, दंत चिकित्सा व नेत्र चिकित्सा की अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध है। साथ ही कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के इलाज के लिए कैंसर अस्पताल है। उसी होमी भाभा कैंसर अस्पताल में अब बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी उपलब्ध हो गई है। ये सुविधा बनारस ही नहीं बल्कि पूर्वांचल के लोगों के लिए नए साल में मिली बड़ी सुविधा है।

टाटा मेमोरियल सेंटर के निदेशक डॉ. राजेंद्र ए बडवे ने सोमवार को अस्पताल में एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा के लिए तैयार वॉर्ड का उद्घाटन किया। इस सुविधा के मिलने के बाद अब कैंसर मरीजों को दिल्ली, मुंबई की भागदौड़ नहीं करनी होगी।

एलोजेनिक बोन मौरो ट्रांसप्लांटेशन ब्लड कैंसर (ल्यूकेमिया और लिंफोमा) के मरीजों के इलाज में बहुत महत्वपूर्ण है। इस संबंध में होमी भाभा कैंसर अस्पताल के उपनिदेशक डॉ. बीके मिश्रा बताते हैं कि इस सुविधा के लिए अस्पताल में सात बेड्स आरक्षित किए गए हैं। हर साल औसतन हमें 25 मरीजों को एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए मुंबई स्थित टाटा कैंसर अस्पताल भेजना पड़ता था। लेकिन अब मरीजों को वाराणसी में ही यह सुविधा मिल सकेगी, जिससे न केवल मरीज का समय बचेगा बल्कि समय रहते ही जरूरी इलाज भी मिल सकेगा।

उन्होंने बताया कि होमी भाभा कैंसर अस्पताल में ट्रांसप्लांट की सुविधा पहले भी थी, लेकिन अब तक केवल ऑटोलोगस बोन मौरो ट्रांसप्लांट ही करते थे, जिसके तहत मरीज के ही शरीर से स्टेम सेल निकालकर वापस उसे उसी मरीज में ट्रांसप्लांट किया जाता था। अब एलोजेनिक बोन मौरो ट्रांसप्लांट से किसी भी स्वस्थ मरीज के शरीर से स्टेम सेल निकालकर किसी दूसरे ब्लज कैंसर के मरीज में ट्रांसप्लांट किया जा सकेगा। होमी भाभा कैंसर अस्पताल एलोजेनिक बोन मौरो ट्रांसप्लांट करने वाला सार्वजनिक क्षेत्र का पूर्वांचल का पहला, जबकि उत्तर प्रदेश का दूसरा सेंटर बन गया है।

इस मौके पर महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र एवं होमी भाभा कैंसर अस्पताल के निदेशक डॉ. सत्यजीत प्रधान ने कहा कि कैंसर मरीजों के इलाज में सहूलियत देने के लिए समय-समय पर नई सेवाओं की शुरुआत की जा रही है। एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट इसी कड़ी का एक हिस्सा है।

टाटा मेमोरियल सेंटर के निदेशक डॉ. राजेंद्र ए बडवे ने कहा कि उत्तर प्रदेश सहित पड़ोसी राज्यों के लिए यह एक बड़ी सौगात है। इसका फायदा सीधे मरीजों को मिलेगा। टाटा मेमोरियल सेंटर कैंसर मरीजों को गुणवत्तापरक और आधुनिक उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसी सेवाओं की शुरुआत हमारी प्रतिबद्धता को और भी मजबूती प्रदान करती है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए अस्पताल के डॉक्टरों और दूसरे कर्मचारियों को यह सुविधा शुरू करने के लिए बधाई दी।

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