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बीएचयू आयुर्वेद संकाय का शोधः गर्म पानी से गंभीर बीमारियों का इलाज

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय के शोधकर्ताओं ने ऐसी खोज की है जिसके जरिए गंभीर से गंभीर रोगों का इलाज महज गर्म पानी से हो सकता है। इसे गर्म जल चिकित्सा कहा जा रहा है। बताया ये भी जा रहा है कि प्राचीन काल में इसे सूर्यजल चिकित्सा कहा जाता रहा। जानते हैं क्या है गर्म जल चिकित्सा...

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BHU

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वाराणसी. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय ने कई ऐसे शोध किए हैं जिनका कोई तोड़ नहीं। प्राकृतिक रूप से तैयार औषधियों से गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज किया जा रहा है। इसी क्रम में अब एक नए शोध पर काम चल रहा है जो अंतिम चरण में है। ये शोध है गर्म जल चिकित्सा पर। दावा है कि गर्म जल चिकित्सा से गंभीर से गंभीर बीमारियां दूर की जा सकती हैं।

प्राकृतिक चिकित्सा विभाग के शोधार्थियों ने किया है अध्ययन

इस नई प्राकृतिक चिकित्सा पर काम कर रहे हैं शीलेंद्र कुशवाहा और खगेंद्र कुशवाहा। इन दोनों शोधार्थियों ने प्राचीन प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति पर काम किया है। इसके तहत भिन्न-भिन्न गंभीर बीमारियों के लिए अलग-अलग तापमान वाले जल में स्नान करने से गंभीर से गंभीर रोग भी ठीक हो सकते हैं। शोधार्थियों का दावा है कि गर्म जल चिकित्सा काफी प्रभावी साबित हुई है।

क्या है गर्म जल चिकित्सा पद्धति

शोधार्थियों के अनुसार गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को 38-40 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले गर्म जल में आधे से पौन घंटे तक रखा गया। ये प्रक्रिया बार-बार दोहराई गई। एक निश्चित तापमान वाले जल में रहने के दौरान मरीज के शरीर में होने वाले रासायनिक परिवर्तन का डेटा एकत्र किया गया। इसके तहत ये देखने को मिला कि शरीर में जमा यूरिक एसि़ड, यूरिया, किएटिनिन, पोटैशियम, कैल्शियम, कोलस्ट्राल आदि शरीर से बाहर निकलने लगे। शोधकर्ताओं की मानें तो ये वो पदार्थ हैं जो शरीर के जिस अंग में एकत्र होते हैं वहां की कोशिकाओं को नष्ट करने लगते हैं।

इन रोगों पर है कारगर

शोधकर्ताओं के मुताबिक गर्म जल चिकित्सा से हाइपर टेंशन, उच्च रक्तचाप, किडनी, मधुमेह, अल्जाइमर, तनाव, अवसाद, खून का पतला होना, अनिद्रा जैसी बीमारियों में कारगर है।

गर्म जल चिकित्सा के अब तक के परिणाम उत्साहजनक हैं। अभी शोध जारी है। बहुत जल्द पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी जाएगी।- प्रो के एन द्विवेदी, संकाय प्रमुख

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