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एक बार फिर चर्चा में BHU, पूछा गया ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ पर सवाल, मचा घमासान

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) एक बार फिर चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाली एक सेमेस्टर परीक्षा में ऐसा सवाल पूछा गया है जो अब विवाद खड़ा कर रहा है।

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Banaras Hindu University

Banaras Hindu University

वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) एक बार फिर चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाली एक सेमेस्टर परीक्षा में ऐसा सवाल पूछा गया है जो अब विवाद खड़ा कर रहा है। इस सवाल के पूछे जाने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। वहीं, सवाल को लेकर ब्राह्मण समाज भी नाराज नजर आ रहा है। हालांकि, सवाल को लेकर अभी तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय की तरफ से कोई स्पष्टीकरण जारी नहीं हुआ है।

क्या था सवाल

दरअसल, सोशल साइंस फैकेल्टी के इतिहास विभाग द्वारा आयोजित की जा रही सेमेस्टर परीक्षा में छात्रों से सवाल पूछा गया, "ब्राह्मणवादी पितृ सत्ता से आप क्या समझते हैं? चर्चा कीजिए कि किस तरह ब्राह्मणवादी पितृ सत्ता ने प्राचीन भारत में महिलाओं की प्रगति में बाधा डाली?" इस सवाल के बाद अब कैंपस में तरह-तरह की बातें होनी शुरू हो गई हैं। इसके साथ ही ब्राह्मण समाज ने इस सवाल को लेकर नाराज की जाहिर की है।

एमए इतिहास की परीक्षा में पूछा गया सवाल

यह सवाल एमए इतिहास के चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में पूछा गया था। बताया जा रहा है कि यह सवाल आधुनिक भारत और महिलाएं विषय के चौथे प्रश्न पत्र में पूछा गया। वहीं, परीक्षा खत्म होने के बाद यह सवाल तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। लोगों ने सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रिया दी है। कुछ लोग इसे सामान्य, जबकि कुछ लोग इसे विवादित बता रहे हैं। लोगों का मानना है कि इस तरह के सवाल समाज को बांटने का काम कर सकते हैं और इससे समाज का एक बड़ा तबका प्रभावित होगा।

छात्रों का अलग-अलग मत

वहीं, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों ने बताया कि हो सकता है कि यह पाठ्यक्रम या शोध का हिस्सा हो। वहीं, कुछ छात्रों ने इस सवाल को अलग तरीके से पूछे जाने को लेकर भी प्रतिक्रिया दी है। इसी वजह से यह सवाल कैंपस के साथ ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

वहीं, विवाद खड़ा होने के बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी तक किसी भी तरह का स्पष्टीकरण नहीं जारी किया है। इसके साथ ही संबंधित सोशल साइंस विभाग से भी किसी तरह का स्पष्टीकरण जारी नहीं हुआ है। विश्वविद्यालय ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह सवाल पाठ्यक्रम के किस हिस्से से लिया गया है।