कोरोना की चपेट से पूरा विश्व प्रभावित हो गया था। ऐसे में सभी देशों ने अपनी तरफ से कोरोना से निपटने की भरपूर कोशिश की। भारत में प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन लगाकर कोरोना से लोगों को बचाना चाहा। उस समय के अंतराल में कोरोना से निपटने के लिए जो नीति बनाई गई वह हद तक असरदार भी रही।
वाराणसी. कोरोना की चपेट से पूरा विश्व प्रभावित हो गया था। ऐसे में सभी देशों ने अपनी तरफ से कोरोना से निपटने की भरपूर कोशिश की। भारत में प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन लगाकर कोरोना से लोगों को बचाना चाहा। उस समय के अंतराल में कोरोना से निपटने के लिए जो नीति बनाई गई वह हद तक असरदार भी रही। इस उपलब्धि पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान अकादमी प्रधानमंत्री मोदी को फेलो ऑफ मेडिकल साइंसेज (एफएएमएस) देने का निर्णय किया है। बता दें कि राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान अकादमी 61वां वार्षिक सम्मेलन 26 से 28 नवंबर तक मना रहा है, जिसमें पीएम मोदी को यह उपलब्धि दी जा रही है।
52 वैज्ञानिकों को फेलोशिप
प्रोफेसर बीआर मित्तल इस सम्मेलन के संरक्षक हैं। यह दो दिन का सम्मेलन है जिसमें कुल 10 वैज्ञानिक सत्र होंगे। दो दिन के इस सम्मेलन के दौरान सात व्याख्यान, सात पुरस्कार पत्र और 48 पोस्टर प्रस्तुत किए जाएंगे। 52 डॉक्टर और वैज्ञानिकों को फेलोशिप दी जाएगी। वहीं, 106 युवा डॉक्टर को सदस्यता प्रदान की जाएगी। पीएम ने कोविड काल से उबरने के बाद भारत के हेल्थ सिस्टम को बहुत बेहतर कर दिया। वहीं, ऑक्सीजन बैंक से लेकर हाईटेक हॉस्पिटल और उनकी सुविधाओं में कई गुना इजाफा किया गया है। इसलिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के इस आयोजन में पीएम मोदी को मानद उपाधि दी जा रही है।