
बीएचयू गेट
वाराणसी. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (Banaras Hindu University) में बुधवार को हुए बवाल के अगले दिन परिसर में तनावपूर्ण शांति है। चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह की तहरीर पर पुलिस ने 15 छात्रों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब पुलिस इन छात्रों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। हालांकि अभी तक कोई उसकी गिरफ्त में नहीं आ सका है। पुलिस कल की घटना के बाबत सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाल रही है। उसके आधार पर उपद्रवियों की शिनाख्त का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन इस घटना को लेकर एक बार फिर से आम आदमी विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल बोर्ड पर सवालिया निशान खड़ा करने लगे हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी फौज आखिर है किस लिए। अगर पुलिस परिसर में न जाए तो ये यूं ही मूक दर्शक बने रहेंगे और परिसर जलता रहेगा। क्या हंगामे के दौरान ये सरसुंदर लाल चिकित्सालय में आए मरीजों और तीमारदारों की सुरक्षा तक नहीं कर सकते। ये विश्वनाथ मंदिर दर्शन को आए श्रद्धालुओं की रक्षा नहीं कर सकते। तो फिर इन पर इतना खर्च क्यूं।
बता दें कि बीएचयू के पास अपना सुरक्षा तंत्र है। इसका सालाना बजट 14 करोड़ रुपये है। 707 गार्ड, 32 सुरक्षा अधिकारी हैं, 60 आर्म गार्ड हैं। बावजूद इसके विश्वविद्यालय की सुरक्षा के लिए हर बार जिला पुलिस को ही हस्तक्षेप करना होता है। चाहे कतिपय छात्रों द्वारा लाइब्रेरी की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन, अनशन से हटाना हो चाहे सिटी स्कैन में धांधली को लेकर धरना देने वाले छात्रों पर कार्रवाई करनी हो। यहां तक कि परिसर में धरनारत छात्रों के समर्थन में जा रहे आम आदमी कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई का सवाल हो। ऐसे में यह चर्चा आम हो रही है कि आखिर इतना बड़ा अमला करता क्या है। किस लिए है। विश्वविद्यालय के ही कुछ प्रोफेसर्स ने दबी जुबान में कहा कि मुख्य आरक्षी सहित विश्वविद्यालय के आला अफसरों के घर पर चाकरी से खाली हों तब तो ये विश्वविद्यालय की सुरक्षा की कमान संभालें। उन्होंने बताया कि 14 करोड़ रुपये खर्च के बाद भी जिला पुलिस को ही सुरक्षा का काम देखना है तो यह बजट सीज कर देना चाहिए।
यहां यह भी बता दें कि अब तक बीएचयू परिसर में जितने हंगामे हुए पुलिस की मदद से ही हालात को काबू में लाया गया। गत 23 सितंबर की घटना में पुलिस पर बड़ा आरोप लगा कि उसने निहत्थी छात्राओं पर लाठीचार्ज किया। ऐसे में इस बार पुलिस ने बहुत धैर्य से काम लिया। वह विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर खड़ी रही। इधर पुलिस तमाशा देखती रही क्योंकि उसे परिसर प्रवेश की इजाजत नहीं थी। उधर उपद्रवी तत्व परिसर में आगजनी, तोड़फोड़ करते रहे। बेगुनाह छात्र-छात्राएं, मरीज और तीमारदार, श्रद्दालु भयवस इधर-उधर जान बचाने को भागते रहे। लोगों का यह भी कहना है कि मुकदमा 15 के खिलाफ दर्ज कराया गया है। मान लिया जाए कि ये नेतृत्वकर्ता होंगे और उनके समर्थकों की टोली होगी पर कितनी बड़ी टोली थी। क्या वे प्रॉक्ट्रोरियल बोर्ड से ज्यादा संख्या थी। फिर ये क्या कर रहे थे।
बता दें कि बुधवार की घटना के बाद चीफ प्रॉक्टर रायना सिंह ने लंका थाने में तहरीर दी। उन्होंने 15 नामजद समेत दर्जनों अज्ञात के खिलाफ बीएचयू में तोड़फोड़, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान समेत कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। एसओ लंका संजीव मिश्र ने बताया कि परिसर में लगे कैमरों से उपद्रवियों की शिनाख़्त की जा रही है और एहतियात के तौर पर मुख्य द्वार पर पीएससी और पुलिस फोर्स तैनात की गई है।
इनके खिलाफ दर्ज हुआ है मुकदमा
चीफ प्रॉक्टर प्रो. सिंह की तहरीर पर एमसीए के गौरव सिंह, एमए के आशुतोष त्रिपाठी, शिवम द्विवेदी, प्रवीण राय योगी, बीए के शुभम तेवतिया, बिट्टू सिंह, गौरव कुमार, अभिजीत मिश्र, रुद्र प्रताप सिंह, हिमांशु प्रभाकर, पूर्व छात्र सौरभ राय, प्रतीक तिवारी। अब इन आरोपियों के नाम को लेकर सवाल खड़ा किए जाने लगे हैं। लोगों का कहना है कि इन 15 में 12 छात्र और पूर्व छात्र इस वक्त शहर से बाहर है। अगर इनकी गिरफ्तारी हुई तो नगर के अन्य यूनिवर्सिटी में कानून व्यवस्था कि स्थिति बिगड़ सकती है। लोगों ने एक बार फिर खुफिया विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल ये है कि अगर आशुतोष की गिरफ्तारी के बाद हंगामे की आशंका थी तो खुफिया विभाग ने पुलिस को अलर्ट क्यों नहीं किया।
Updated on:
11 Jan 2018 04:46 pm
Published on:
21 Dec 2017 01:12 pm

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