
रात का घना अंधेरा...वाराणसी के चौबेपुर रोड पर पसरा सन्नाटा और दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की डरावनी अवाजें। घड़ी की सुइयां जैसे-जैसे आगे बढ़ रही थी, वैसे-वैसे वहां मौजूद एसटीएफ के जवानों की धड़कनें तेज हो रही थी। किसी को नहीं पता था कि अगले ही पल वहां गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई देने वाली है।
आधी रात के बाद का वक्त रहा होगा। एसटीएफ की टीम को पक्की खबर थी कि 1 लाख का इनामी शूटर बनारसी यादव इसी रास्ते से गुजरने वाला है। अचानक हेडलाइट की रोशनी चमकती है और एसटीएफ की टीम उसे रुकने का इशारा करती है। इसी बीच इंस्पेक्टर की आवाज सन्नाटे को चीरती है- बनारसी पुलिस ने तुम्हे घेर लिया है। सरेंडर कर दो।
सरेंडर की बात सुनते ही बनारसी बौखला गया और पिस्तौल निकाल कर बिना सोचे-समझे पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। ठांय-ठांय की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा। दो गोलियां तो सीधे एसटीएफ के सिपाहियों के कान के पास से सनसनाती हुई निकली। इसके बाद एसटीएफ टीम ने जवाबी फायरिंग शुरू कर दी।
बनारसी और जवानों के बीच आमने-सामने 5 राउंड फायरिंग हुई। अचानक एक चीख सुनाई दी और फायरिंग रुक गई। जब पुलिस ने टॉर्च की रोशनी उस ओर घुमाई तो देखा कि बनारसी यादव खून से लथपथ जमीन पर पड़ा है। उसके शरीर में दो गोलियां लगी है। लहूलुहान हालत में एसटीएफ की टीम उसे अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके पास से दो पिस्टल और कारतूस बरामद किए गए हैं।
बनारसी यादव गाजीपुर के करंडा का रहने वाला था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, उस पर 10 हत्याओं समेत कुल 21 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।
करीब पांच महीने पहले 50 करोड़ रुपये की जमीन को लेकर खड़े विवाद में प्रॉपर्टी डीलर योगेंद्र ने कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या की सुपारी दी थी। इस काम के लिए बनारसी यादव को 5 लाख रुपये देने की डील तय हुई। इसके बाद बनारसी ने फौजी अरविंद यादव और विशाल समेत तीन शूटरों को साथ पूरी प्लानिंग के साथ 21 अगस्त 2025 को कॉलोनाइजर की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी। कॉलोनाइजर की हत्या के मामले में पुलिस ने बनारसी पर 1 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। इसके बाद से वह फरार हो गया था।
Updated on:
4 Feb 2026, 10:00 AM IST
Published on:
4 Feb 2026, 9:23 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.