
गांव में रहने वाले लोग दुनिया को देंगे कोरोना का इलाज, भारत में हो रहा रिसर्च, 400 सैम्पल भेजे गए चेन्नई
मऊ. वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के इलाज के लिए भारत में रिसर्च (Research for Corona Treatment) हो रहा है। कोविड-19 (Covid-19) की रोकथाम के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) की टीम रिसर्च कर रही है। टीम से जुड़े बीआरडी मेडिकल कॉलेज के दो वैज्ञानिकों ने मऊ ज़िले के 400 लोगों का सेम्पल लेकर चेन्नई भेजा है। अगर सबकुछ सही रहा तो इस रिसर्च का फायदा करोड़ों लोगों को हो जाएगा।
वैज्ञानिक डॉ.राकेश पांडेय व डॉ. कामरान ने बताया कि कोरोना संक्रमण के बाद शरीर में बनने वाले एंटीबॉडी का अध्ययन इस दिशा में कारगर साबित होगा। उन्हें उम्मीद है कि यह अध्ययन अच्छा परिणाम देगा।
कारगर हो सकता है ये रिसर्च
दरअसल वैज्ञानिकों की तरफ से जो रिसर्च किया जा रहा है वो उन लोगों पर है जो कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में आए लेकिन उन पर संक्रमण का असर नहीं हुआ। वैज्ञानिकों ने ऐसे लोगों का सैंपल लेकर अध्ययन शुरू किया है। इसके जरिये बॉडी में विकसित उस तत्व का पता लगाया जा सकेगा जो कोरोना के खतरे को रोकने में कामयाब साबित हुआ है। उसी के आधार पर दवा की योजना बनाई जाएगी।
400 सामान्य लोगों की हुई सैम्पलिंग
जांच के लिए जिले 10 गांवों के 400 उन लोगों को चिन्हित किया गया था, जो सिर्फ गांव में ही रहते हैं। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि इन लोगों के अंदर क्या कोई सिम्टम है, या फिर गांव में रहने वालों की इम्युनिटी पावर से कोरोना का खतरा कितना कम हो रहा है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता की भी जांच
डीटीओ डॉ. एसपी अग्रवाल ने बताया कि आईसीएमआर की टीम ने दो दिन में 400 सैंपल लिया है। सैंपल से कोरोना की जांच के अलावा रोग प्रतिरोधक क्षमता की जांच की जाएगी।
Published on:
20 May 2020 02:37 pm

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