पूरे देश में दशहरे के दिन रावण दहन से पहले रामलीला का मंचन दहन मैदान में होता है, लेकिन काशी के बीएलडब्ल्यू रेल कारखाने के खेल मैदान में होने वाली रामलीला अपने आप में खास है। यह गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है।
वाराणसी। काशी में रामनगर की रामलीला का अद्भुत स्वरुप देखे भक्त निहाल होते हैं। वहीं काशी में मौजूद बीएलडब्ल्यू (बनारस रेल इंजन कारखाना) में दशहरे के दिन होने वाली रामलीला खास है। यहां दशहरे के दिन रामलीला मैदान में होने वाली रामलीला अपने आप में खास है। यहां बीएलडब्ल्यू के रहने वाले लोगों के बच्चे रूपक पर रामलीला का मंचन मोनो एक्टिंग के थ्रू करेंगे। इसके अलावा इस रामलीला में गंगा जमुनी मिसाल भी देखने को मिलेगी। रामलीला का रावण जहां तीन पीढ़ियों से काशी के ही रहने वाले शमशाद खान और उनका परिवार बना रहा है। वहीं इस अनोखी रामलीला में अंगद और जामवत का अभिनय करने वाले भी मुसलमान हैं।
रामचरित मानस के रूपक पर मोनो एक्टिंग
एसडी सिंह निदेशक विजय दशमी समिति बीएलडब्ल्यू ने बताया कि यहां दो प्रकार की रामलीला होती है। एक रंगशाला में दस दिन तक होती है। वहीं दशहरे के दिन रामचरित मानस के रूपक पर पात्र मोनो एक्टिंग करते हैं। इसके अलावा इसमें एक खासियत ये है कि महिलाओं का पात्र महिला और पुरुषों का पात्र पुरुष ही निभाते हैं। पहले यह रामनगर में भी होता था पर यह अब सिर्फ और सिर्फ बीएलडब्ल्यू में होता है।
65 बच्चे करेंगे मंचन
राम वनगमन से रावण वध तक की लीला भारतीय लोकगीत की 14 विधाओं के गीत गाकर मंचन होगा। दो से ढाई महीने हमारे यहाँ रिहारल होता है। इसमें 52 छात्र और 13 छात्राएं पात्र निभाती हैं। इसके अलावा साज के लिए बाहर से पार्टी बुलाई जाती है। इस रामलीला की शुरुआत जब हुई तो यहां के इंटर कालेज में राम प्रवेश तिवारी और महेंद्र कुमार नीलम और राम विनायक जी की रचित और शुरुआत की हुई रामलीला है और 1989 से मै इसे देख रहा हूँ।
रामलीला में दिखाया देती है गंगा जमुनी तहजीब
निदेशक डीएस सिंह ने बताया की हम गंगा जमुनी तहजीब पर हमेशासे कमा करते हैं। हमने रामलीला के सचिव एखलाक अहमद खां को बनाया गया। इसके अलावा हमारे रूपक में अंगद का जो रोल प्ले कर रहा है उसका नाम सोहराब हुसैन है। इसके अलावा जो जामवत बना है वह भी मुसलामन है। ऐसे में गंगा जमुनी तहजीब का हर पल इस रामलीला में झलक दिखाई देती है। रावण का पुतला हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पिछले तीन दशकों से खान परिवार बना रहा है। आज भी वो लगे हुए हैं।
इस वर्ष 75 फिट ऊंचा रावण
रावण का पुतला बना रहे शमशाद खां ने बताया कि हमारी तीन पीढ़ियां यहां रावण बनाती आ रहीं हैं। इस कार्य के लिए हमें 10 दिन का समय लगता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष रावण का पुतला 75 फिट ऊंचा बनाया जा रहा है। इसके अलावा कुम्भकरण और मेघनाद का भी पुतला बनकर तैयार हो रहा है।