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इन चीनी मिलों को बेचने के आरोप में सीबीआई ने शुरू की जांच, मायावती के साथ नसीमुद्दीन सिद्दिकी पर गिर सकती है गाज

सीएम योगी आदित्यनाथ ने खेला बड़ा दांव, सपा व बसपा गठबंधन को भी हो सकता है नुकसान

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Mayawati and  Nasimuddin siddiqui

Mayawati and Nasimuddin siddiqui

वाराणसी. इसे संजोग कहे या फिर राजनीति का पैतरा। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले ही 21 चीनी मिलों की बिक्री की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने जांच कराने की संस्तुति की थी जिसके बाद से सीबीआई सक्रिय हो गयी है माना जा रहा है कि इस प्रकरण को लेकर मायावती व कभी उनके खास रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर भी गाज गिर सकती है यदि ऐसा होता है तो सपा व बसपा गठबंधन को तगड़ा झटका लगना तय है।
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पूर्वांचल में चीनी मिल का महत्व किसी से छिपा नहीं है। सभी राजनीतिक दलों ने गन्ना किसानों को राहत देने के लिए सरकारी चीनी मिलों को शुरू करने का वायदा करते आये हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार भी इस सूची में शामिल है। सीएम योगी ने दो चीनी मिल का शिलन्यास किया है यह कब चालू होगी। यह बताना संभव नहीं है। बसपा सरकार में तत्कालीन सीएम मायावती के कार्यकाल में यूपी की 21 चीनी मिले बेच दी गयी थी। आरोप है कि एक उद्योगपति को लाभ पहुंचाने के लिए बंद के साथ चल रही चीनी मिल भी औने-पौने दाम में बेची गयी थी। उस समय इन चीनी मिलों को बेचने में बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ बसपा के दिग्गज नेता रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी का भी नाम आया था। यह चीनी मिल सीबीआई ने इस मामले की रामकोला, बरेली, देवरिया, बरेली, हरदोई, बाराबंकी आदि जगहों पर थी।
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सीबीआई जल्द दर्ज कर सकती है मायावती के खिलाफ एफआईआर
सीबीआइ ने बिक्री की गयी चीनी मिलों के दस्तावेजों को खंगालना शुरू कर दिया है। सीबीआइ पता करना चाहती है कि इन चीनी मिलों को किस आधार पर बेचा गया है और बेचने का क्या कारण था। जिस समय इन चीनी मिलो को बेचा गया है यह घाटे में थी या कोई और बात थी। बेचते समय इन चीनी मिलो की कीमत कितनी थी और कितने कीमत पर इन्हें बेचा गया था। सीबीआइ इस मामले में मायावती पर एफआईआर दर्ज कर सकती है यदि ऐसा होता है तो मायावती की फजीहत बढऩा तय है। फिलहाल सबकी निगाहे सीबीआइ पर लग गयी है और देखना है कि इस मुद्दे को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती किस तरह पलटवार करती हैं।
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