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BHU का हिस्सा सेंट्रल हिंदू स्कूल की प्रवेश प्रक्रिया को लेकर बढ़ा विवाद, छात्रों ने किया प्रदर्शन

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) का हिस्सा सेंट्रल हिंदू स्कूल की प्रवेश प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। छात्र-छात्राओं ने प्रवेश प्रक्रिया का विरोध भी शुरू कर दिया है। दरअसल ये विरोध स्कूल में प्रवेश के लिए लाटरी प्रक्रिया अपनाने का विरोध हो रहा है। बता दें कि दो साल पहले तक सेंट्रल हिंदू स्कूल में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा होती रही, जिसमें देश भर के विद्यार्थी भाग लेते थे।

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सीएचएस की प्रवेश प्रक्रिया के विरोध में बीएचयू सेंट्रल आफिस पर विरोध प्रदर्शन करते छात्र-छात्राएं

सीएचएस की प्रवेश प्रक्रिया के विरोध में बीएचयू सेंट्रल आफिस पर विरोध प्रदर्शन करते छात्र-छात्राएं

वाराणसी. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) का अभिन्न अंग सेंट्रल हिंदू स्कूल (CHS) में दाखिले की प्रक्रिया को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। छात्र-छात्राएं प्रवेश के लिए लाटरी प्रक्रिया अपनाए जाने का विरोध कर रहे हैं। वो पहले की तरह प्रवेश परीक्षा की मांग कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपनों के बच्चों के दाखिले के लिए ये लाटरी सिस्टम अपना रहे हैं।

सीएचएस में दो साल पहले तक होती रही अखिल भारतीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा

बता दें कि कोरोना काल से पहले सीएचएस में प्रवेश परीक्षा के आधार पर दाखिला लिया जाता रहा। इस प्रवेश परीक्षा में देश भर के विद्यार्थी भाग लेते रहे। मगर कोरोना संक्रमण के चलते सीधी भर्ती शुरू हुई जो अब लाटरी सिस्टम में तब्दील कर दी गई है। विद्यार्थी इसका विरोध कर रहे हैं।

सीएचएस से ही शुरू हुआ था बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

वाराणसी में एनी बेसेंट ने कमच्छा इलाके में सेंट्रल हिंदू स्कूल की स्थापना की। बाद में यहीं से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की शुरूआत हुई। बाद में बीएचयू परिसर के निर्माण के बाद कमच्छा स्थित परिसर में 12वीं तक की पढ़ाई होती है। इसके तीन परिसर हैं एक छोटे बच्चों के लिए, कोल्हुआ पर, इसके अलावा कमच्छा क्षेत्र में लड़कों व लड़कियों के लिए कॉलेज है।

विरोध करने वालों ने कहा लाटरी सिस्टम अनुचित

लाटरी से दाखिले का विरोध करने वाले छात्रों का कहना है कि कोरोना काल में लाटरी सिस्टम का उपयोग किया गया वो सही रहा क्योंकि तब किसी को कही आने-जाने की इजाजत नहीं रही। कोरोना गाइडलाइन का पालन करना अनिवार्य था। अब जब सारी पाबंदियां हटा दी गई हैं तो फिर लाटरी क्यों? ये सही नहीं है।

कोरोना काल में भी रहा विरोध

बता दें कि सीएचएस में 6वीं, 9वीं और 11वीं में दाखिले के लिए लाटरी सिस्टम की घोषणा कर दी गई है। इसमें लॉटरी के साथ ही बोर्ड परीक्षा के प्राप्तांक भी जोड़े जाएंगे। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया को तो कोरोना काल में भी लोगों ने स्वीकार नहीं किया पर तब उनकी मजबूरी रही।

एनएसयूआई ने लाटरी सिस्टम का विरोध शुरू किया, बड़े आंदोलन की चेतावनी

सीएचएस में दाखिले के लिए ई-लॉटरी सिस्टम का शनिवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों ने जमकर विरोध किया। छात्र संगठन एनएसयूआई के नेतृत्व में छात्र-छात्राएं बीएचयू के केंद्रीय कार्यालय पर एकत्र हुए और प्रदर्शन करने लगे। उन्होंने कुलपति प्रो सुधीर जैन को संबोधित ज्ञापन सौंपा। छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के चलते काफी देर तक कोई केंद्रीय कार्याल में प्रवेश नहीं कर सका। विरोध करने वाले छात्रों का कहना रहा कि कोरोना संक्रमण का प्रभाव जब नगण्य हो चुका है और सारी पाबंदियां हटा ली गई हैं तो फिर पूर्वांचल ही नहीं देश के प्रतिष्ठित स्कूल में एक सीएचएस में ई-लॉटरी क्यों?

शिक्षण संस्थान में दाखिले के लिए जुआ!

बीएचयू के केंद्रीय कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता डॉ विकास सिंह ने कहा कि लॉटरी तो जुआ है, फिर शिक्षण संस्थान में जुए के जरिए दाखिला? ये कहीं से उचित नहीं। डॉ सिंह ने चेतावनी दी कि अगर दो दिन के प्रवेश प्रक्रिया में बदलाव न हुआ तो बड़ा छात्र आंदोलन शुरू होगा। कहा कि यहां महामना मदन मोहन मालवीय, डॉ. राधाकृष्णन, आचार्य नरेंद्र देव और डॉ. लालजी सिंह जैसे कुलपतियों की महान परंपरा रही है। अब प्रो. सुधीर कुमार जैन कई तरह के सुधार कर रहे हैं, वह सराहनीय है, मगर इसी के साथ उन्हें इस जुए को भी खत्म करना चाहिए।


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