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प्रधानमंत्री जी, इस भाई की भी सुन लें फरियाद, बहन परदेश में है संकट में

अमेरिका में फंसी पूर्वांचल की बेटी दीपिका के भाई डॉ. अजय ने 2 नवंबर को पीएम के संसदीय कार्यालय में मदद के लिए की थी गुहार, दिया था पत्र।

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Ajay Chaturvedi

Nov 08, 2016

Deepika Pandey

Deepika Pandey

वाराणसी. पूर्वांचल के आजमगढ़ की रहने वाली दीपिका पांडेय, पति साफ्टवेयर इंजीनियर हरिओम के साथ रह रही थी अमेरिका के बोस्टन मे। बीते 19 अक्टूबर (करवाचौथ) को पति का हर्ट अटैक से निधन हो गया। पति की मौत के वक्त दीपिका गर्भवती थी। अब सात नवंबर को उसने एक बेटी की जन्म दिया है। हरिओम के मित्र दीपिका को बोस्टन से न्यू जर्सी ले गए हैं। अब सबसे बड़ा संकट दीपिका के साथ उनके नवजात शिशु को भारत लाना है। उसका वीजा, पासपोर्ट बनवाना है। ओसीआई (ओवर सीज सिटिजन ऑफ इंडिया) बनवाना है। इसके लिए भारत सरकार की मदद की दरकार है। विदेश मंत्रालय की पहल की दरकार है। इस संबंध में दीपिका के भाई रेलवे कैंसर हास्पिटल, वाराणसी में कार्यरत डॉ. अजय चौबे ने अमेरिका रवाना होने से पूर्व दो नवंबर को प्रधानमंत्री के रवींद्रपुरी कालोनी,वाराणसी स्थित संसदीय कार्यालय में आवेदन किय था। विस्तार से पूरी जानकारी दी थी। लेकिन अब तक उस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा सका है। दीपिका परेशान है, भाई डॉ. अजय परेशान हैं। उन्हें केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय से मदद चाहिए।



Dr.Ajaay appeal





पूर्वांचल की बेटी आना चाहती है स्वदेश
डॉ. अजय ने पीएम को बताया है, च्मेरी बहन दीपिका पांडेय, बीएचयू के महिला महाविद्यालय की छात्रा रही। इस समय सात समंदर पार अमेरिका के फाल रीवर (बोस्टन) मस्साचुसेट्स में गंभीर संकट से जूझ रही है। दीपिका के पति हरिओम पांडेय, साफ्टवेयर इंजीनियर थे। वह नौकरी के लिए 2013 में अमेरिका (ओसीआई साफ्टवेयर) चले गए। गत 19 अक्टूबर को उनका निधन हो गया। दीपिका को चार साल का बेटा अथर्व है। उस पर मूसिबत का पहाड़ टूट पड़ा है। डॉ. अजय ने दो नवंबर के पत्र में बताया था कि दीपिका प्रसव के बाद ही भारत आ सकती है। अब सात नवंबर को उसने एक बेटी को जन्म दिया है। अब उसे जल्द से जल्द भारत लाना है। कारण बोस्टन से न्यू जर्सी लाने के बाद उसके इलाज में भी बड़ी दिक्कत आएगी।




नवजात शिशु को चाहिए भारतीय नागरिकता
सबसे बड़ा संकट नवजात शिशु के भारतीय नागरिकता और अमेरिकी पासपोर्ट को लेकर है। इसके लिए विदेश मंत्रालय अगर पहल करे तो बात बन सकती है। डॉ. अजय के मित्र, डीरेकाकर्मी अविनाश पाठक ने सात नंवबर की रात ही विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट किया था। इस खबर को पत्रिका ने चलाया था। अविनाश ने पत्रिका को बताया कि एक अच्छी सूचना है कि इस बार अविनाश के ट्वीट के साथ जो खबर पत्रिका ने चलाई थी उसे विदेश मंत्री ने संज्ञान लिया है। उम्मीद बंधी है। लेकिन अगर प्रधानमंत्री की ओर से पहल हो जाए तो बात बन जाएगी। उन्होंने पुनः प्रधानमंत्री से अरदास की है कि वह इस बेटी के लिए मासूम बच्ची के लिए पहल करें।







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