डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी
वाराणसी. मां अन्नपूर्णा, वो माता जिससे काशी पुराधिपति बाबा विश्वनाथ में मांगी थी भिक्षा। अन्न-धन की अधिष्ठात्री देवी मां अन्नपूर्णा की स्वर्ण प्रतिमा के दर्शन व अन्न व धन प्राप्त करने को धनतेरस यानी सोमवा को सुबह 04 बजे से ही लग गई मां अन्नपूर्णा के दरबार में लंबी कतार। भक्तों का सैलाब ऐसा कि लाख प्रयास के बावजूद धक्कामुक्की। बस सबकी एक ही इच्छा किसी तरह माता रानी के दरबार में पहुंच जाएं। एक बार मां के दर्शनलाभ मिल जाएं। अद्भुत व दिव्य प्रतिमा मां की। अलौकिक, एक बार निगाह गई तो बस टिकी ही रह जाती है। मां अन्नपूर्णा, भूमि देवी और लक्ष्मी की स्वर्ण प्रतिमा के दर्शन के बाद महंत रामेश्वर पुरी के हाथों अन्न के रूप में धान का लावा और अप्रचलित सिस्का पा कर श्रद्धालु धन्य हुए।
मां के दरबार में पहुंचने को रात से ही लग गई थी कतार
मां के दिव्य स्वरूप के दर्शन व अन्न-धन प्राप्त करने के लिए भक्तों की कतार रात से ही लग गई थी। आलम यह कि डेढ़सी पुल से बांसफाटक तक अटूट कतार लगी थी। भोर से दर्शन शुरू है लेकिन कतार है कि टूटने का नाम ही नहीं ले रही। इसमें बालक, बालिका, वृद्ध, नौजवान, महिला-पुरुष सब एक दूसरे का हाथ थामे कतार में लगे रहे। हर किसी को अपनी बारी की प्रतीक्षा रही। मंदिर में पहुंच कर सभी ने माता के आगे श्रद्धापूर्वक शीस नवाया।
ये है कथा
महंत अन्नपूर्णा रामेश्वर पुरी ने बताया कि बात उन दिनों की है जब काशी से देवता बाहर हो गए थे। एक साल दुर्भिक्ष यानी अकाल पड़ा तो तत्कालीन राजा ने अपने मंत्री धनंजय से इसे दूर करने को कहा। धनंजय का जवाब था कि इस दुर्भिक्ष से केवल मां अन्नपूर्णा ही पार लगा सकती हैं। इस पर राजा देवो दास ने मंत्री धनंजय को माता को प्रसन्न करने का निर्देश दिया। धनंजय ने घोर तपस्या कर मां अन्नपूर्णा को प्रसन्न किया, फिर उन्हों माता को बताया कि काशी में दुर्भिक्ष पड़ा है आप ही इसे दूर कर सकती हैं। इस पर मां अन्नपूर्णा काशी आईं और यहां का संकट दूर किया। उसी वक्त से मेरे पूर्वज यहां हर साल धनतेरस पर अन्न के रूप में लावा और समाज में अप्रचलित सिक्का वितरित करते हैं। यह परंपरा सैकड़ों साल से चली आ रही है। भोर में चार बजे से रात 11 बजे तक अन्न व धन का वितरण होता है। उन्होंने बताया कि यह दुनिया का अकेला मंदिर है जहां अन्न के साथ धन भी वितरित होता है। कहा कि धनतेरस से अन्नकूट तक माता की स्वर्ण प्रतिमा का दर्शन होता है। अन्नकूट पर 56 प्रकार के व्यंजन का भोग लगता है साथ ही उसे भक्तों के बीच वितरित किया जाता है।
मंगल बेला में मां का षोडशोपचार पूजन और भव्य आरती
बता दें कि मां अन्नपूर्णा, भूमि देवी और लक्ष्मी माता की स्वर्णमयी प्रतिमा का विग्रह श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से कुछ ही दूर स्थित माता अन्नपूर्णा मंदिर के प्रथम तल पर अवस्थित है। मंदिर का पट श्रद्धालुओं के ले धन त्रयोदशी की सुबह मंगला आरती के बाद 04 बजे भोर में खुला। सोमवार 05 अक्टूबर को प्रातःकालीन मंगल बेला में मां का षोडशोपचार पूजन और भव्य आरती हुई। फिर भक्तो के बीच में वितरित होने वाले खजाने का विधि-विधान से पूजन कर श्रधालुओं के दर्शन के लिए माता के मंदिर का पट खोल दिया गया। दोपहर में भोग आरती के लिए आधे घंटे के लिए मंदिर का पट बंद रहा। भोग आरती के बाद 12. 30 बजे से दर्शन शुरू हुआ जो रात 11 बजे तक जारी रहेगा।
जन्म जन्मांतर तक रहती है मां की कृपा
महंत रामेश्वर पुरी का कहना है कि मां की स्वर्णमयी प्रतिमा का दर्शन कर खजाना प्राप्त करने से वर्ष भर घर-परिवार में सुख-शांति और अन्न-धन की कमी नहीं होती। कहा कि इसी जन्म नहीं बल्कि जन्मजन्मांतर तक भक्त को किसी तरह की कमी नहीं होती। खजाने का वितरण वर्ष में केवल एक बार धनतेरस को ही होता है, जिसे प्राप्त करने के लिए भक्तो का हुजुम माता के दरबार में उमड़ता है।
मां की स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन व खजाना प्राप्ति का महत्व
धनतेरस के दिन मां का अनमोल खजाना खोला जाता है। मंदिर के महंत रामेश्वरपुरी द्वारा श्रद्धालुओं में इसे धनतेरस के दिन वितरित करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस खजाने के पैसे को अगर अपने घर में और लावे को अन्न की पेटी में रखा जाए तो कभी किसी चीज की कमी नहीं हो सकती।
धनतेरस पर श्रद्धालुओं के लिए मंदिर ने की है यह व्यवस्था
इस बार धनतेरस पर प्रशासनिक वरियता के आधार पर बुजुर्गो और दिव्यांगो को मां का सुलभ दर्शन कराया जा रहा था। मंदिर में आने वाले दिव्यांग या बुजुर्गो के लिये मंदिर प्रबंधन ने सहायक तैनात कर रखे थे जो दिव्यांग या बुजुर्गो को सीढ़ी के रास्ते सीधे दर्शन करवा कर निकास द्वार से बाहर पहुचा रहे थे। प्यासे भक्तों को पानी पिलाने के लिए भी कुछ लोगों को तैनात किया गया था। दूर दराज से आये भक्तो को किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य सम्बंधित समस्या होती है तो उन्हें तत्काल उपचार की सुविधा भी थी।
पुख्ता सुरक्षा बंदोबस्त
सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत मंदिर परिसर में लगभग दो दर्जन सीसीटीवी कैमरे लगे हुये है.। मंदिर परिसर में कंट्रोल रूम बना था जहां तैनात सुरक्षाकर्मी व व्यवस्थापक लगातार कैमरे के जरिए परिसर के चप्पे-चप्पे पर नजर रख रहे थे। एक आपरेटर की तैनाती थी जो कि हर गतिविधियों पर ध्यान बनाए था।
