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Kaal Bhairav Puja : रविवार को करें कालभैरव की पूजा, सभी रोगों से मिलेगी मुक्ति

कालभैरव भगवान शिव के रूद्र रूप हैं भगवान शिव के क्रोधित होने पर काल भैरव की उत्पत्ति हुई। माना जाता है कि सच्चे मन से भैरव की पूजा करने से भगवान तुरंत फल देते है।

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Kal Bhairav

कालभैरव

वाराणसी. कालभैरव भगवान शिव के रूद्र रूप हैं भगवान शिव के क्रोधित होने पर काल भैरव की उत्पत्ति हुई। माना जाता है कि सच्चे मन से भैरव की पूजा करने से भगवान तुरंत फल देते है। रविवार के दिन अगर आप भैरव के कुछ मंत्र का उच्चारण करते है तो आपके लिए शुभ हो सकता है। इससे आपकी हर मनोकामना पूरी होगी। रविवार के दिन नहा-धोकर कालभैरव की फूल, माला, दीपक जलाकर पूजा करें। इसके साथ ही भैरव के इस मंत्र का 108 बार जप करें। इससे आपको तुरंत फल मिलेगा। आपके सारे कष्ट दूर हो जाएंगे।


इस मंत्र का ध्यान से करें जप
॥ऊं भ्रं काल भैरवाय फ़ट॥
।। ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नम:।।
|| ॐ भयहरणं च भैरव: ||
शत्रु बाधा निवारण हेतु -
ऊं ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं।
इस साधना से मिलती है रोगों से मुक्ति

साधना यंत्र
श्री बटुक भैरव का यंत्र लाकर उसे साधना के स्थान पर भैरवजी के चित्र के समीप रखें। दोनों को लाल वस्त्र बिछाकर उसके ऊपर यथास्थिति में रखें। चित्र या यंत्र के सामने हाल, फूल, थोड़े काले उड़द चढ़ाकर उनकी विधिवत पूजा करके लड्डू का भोग लगाएं। इस साधना को किसी भी रविवार या मंगलवार या मंगल विशेष अष्टमी के दिन करना चाहिए शाम 7 से 10 बजे के बीच करें।


साधना चेतावनी
साधना के दौरान खान-पान शुद्ध रखें। सहवास से दूर रहें। वाणी की शुद्धता रखें और किसी भी कीमत पर क्रोध न करें। यह साधना किसी गुरु से अच्छे से जानकर ही करें।
1. यदि आप भैरव साधना किसी मनोकामना के लिए कर रहे हैं तो अपनी मनोकामना का संकल्प बोलें और फिर साधना शुरू करें।
2. यह साधना दक्षिण दिशा में मुख करके की जाती है।
3. रुद्राक्ष या हकीक की माला से मंत्र जप किया जाता है।
4. भैरव की साधना रात्रिकाल में ही करें।
5. भैरव पूजा में केवल तेल के दीपक का ही उपयोग करना चाहिए।

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