
Central Discovery Center
वाराणसी. सामाजिक सरोकारों से जुड़े शोध के मामले में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय पहले से ही आगे रहा है। लेकिन अब कुछ ऐसा होने जा रहा है इस विश्वविद्यालय में जिससे समाज को और बेहतर नतीजे मिलने की उम्मीद जगी है। दरअसल यहां मल्टी फेकेल्टी रिसर्च की सुविधा एक छत के नीचे मिलने जा रही है। इतना ही नहीं तमाम अलग-अलग विधाओं पर एक छत के नीचे काम होगा और इसके लिए किसी शोधार्थी को कहीं अन्यत्र जाना भी नहीं होगी। शोध से जुड़े सारे उपकरण से लेकर तकनीकी जानकारियां तक मिलेंगी।
दरअसल बीएचयू में जनवरी 2020 में ही शुरू होने जा रहा है देश का पहला सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर। इस सेंटर की खासियत यह होगी कि इसमें न केवल बीएचयू, बल्कि देश के किसी भी विश्वविद्यालय, उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और छात्र विज्ञान, तकनीकी, इतिहास, कृषि, मेडिकल आदि से जुड़े शोध कर सकेंगे। किसी भी उपकरण के लिए दूसरी जगहों पर जाने की जरूरत नहीं होगी। अगर शोध कार्य के दौरान किसी शिक्षक या शोध छात्र को दूसरे विश्वविद्यालयों के शिक्षकों से कोई जानकारी चाहिए होगी तो वह विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात कर सकेंगे। इसके अलावा विदेशों के विद्वानों के लेक्चर भी ऑनलाइन यहां होंगे।
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आठ मंजिला इस सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर में हर मंजिल पर अलग-अलग शोध के लिए प्रयोगशाला होगी। इसके अलावा एजुकेशनल मीडिया और इनोवेशन सेंटर, हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सेंटर भी उपलब्ध होगा। रिसर्च पर नजर रखने के लिए अलग कमेटी होगी। कमेटी के अप्रूवल के बाद ही बाहरी वैज्ञानिकों को प्रयोगशाला में काम करने का मौका मिलेगा।
यह सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर पुरावशेषों के बारे में अध्ययन करने वाला देश का पहला केंद्र होगा। यहां की प्रयोगशाला में स्थापित आइसोटोप्स रेशियो मॉस स्पेक्ट्रोमेटी (आईआरएमएस) से पुरावशेषों की सही उम्र का पता लग सकेगा। अब तक सही उम्र का पता लगाने के लिए पुरावशेषों को विदेशों के विश्वविद्यालयों में भेजना पड़ता है या पुरातत्विद केवल आकलन ही कर पाते हैं।
डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नॉलजी की ओर से सुपर स्फीकेटेड एनालिटिकल इक्यूपमेंट स्कीम के तहत सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर को मिले उपकरणों में इमेजिंग सेटअप और मटीरियल एनालिसिस आईसीपीएमएस भी शामिल है। इमेजिंग सेटअप में इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप लगाया जाएगा। इससे छोटी से छोटी कोशिका के भाग देखे जा सकेंगे। जबकि कनफोकल माइक्रोस्कोप से किसी मटेरियल की स्थिति जानने में आसानी होगी।
बीएचयू में सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर खोलने की शुरूआत दो साल पहले हुई थी। इसके लिए 15000 वर्ग मीटर क्षेत्र में 100 करोड़ की लागत से 8 मंजिला भवन बनने के बाद 150 करोड़ की लागत से आधुनिक उपकरण लगाने का काम अंतिम दौर में है।
Updated on:
27 Dec 2019 02:49 pm
Published on:
27 Dec 2019 02:48 pm
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