
पूर्वांचल में विकास के लिए भावनात्मक नहीं, रचनात्मक राजनीति की जरूरत: सुखदेव राजभर
वाराणसी. पूर्वांचल का विकास करना है तो भावनात्मक नहीं, रचनात्मक राजनीति की जरूरत है। यह बात पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर ने कही। वाराणसी में आयोजित पत्रिका की-नोट को संबोधित करते हुए राजभर ने कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आखिर पूर्वांचल में सबसे अधिक अपराध क्यों है? संसाधन होने के बाद भी यहां के लोग बेरोजगार क्यों हैं? पौराणिक स्थल होने के बाद भी यह पर्यटन स्थल के रूप में विकसित क्यों नहीं हो सका? भ्रष्टाचार यहां सबसे अधिक क्यों है? शायद इसलिए, क्योंकि यह सबसे घनी आबादी वाला क्षेत्र है और यहां योजनाओं की मॉनीटरिंग नहीं हो पाती।
पूर्वांचल बने अलग राज्य
उन्होंने कहा कि पूर्वांचल की भौगोलिक और सांस्कृतिक स्थिति पर गौर करें तो हमें खुद ब खुद समझ में आ जाएगा कि पूर्वांचल राज्य क्यों जरूरी है। उन्होंने कहा कि बुदेलखंड और पूर्वांचल में बड़ी भिन्नता है। वहां दो से तीन किलो मीटर पर गांव के सरहद हैं और हमारे यहां पांच सौ मीटर पर गांव का सरहद हैं। यहां सारे झगड़े जमीन के हैं। कारण कि आबादी का घनत्व काफी ज्यादा है। इन्हीं चीजों को ध्यान में रखकर वर्ष 2011 में बसपा सरकार ने केंद्र सरकार को अलग पूर्वांचल राज्य का प्रस्ताव भेजा था। अगर हमें पूर्वांचल को विकास की मुख्य धारा से जोडऩा है और यहां से भ्रष्टाचार को कम करना है तो सबसे पहले हमें भवनात्मक की जगह रचनात्मक राजनीति करनी होगी। साथ ही पूर्वांचल राज्य का गठन करना होगा। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने राजनीति के अपराधीकरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीति में अपराधीकरण भी बड़ी समस्या है। हमारे ऊपर प्रदेश और देश के विकास की जिम्मेदारी है और हम ही है जो दस हत्या कर सदन में पहुंच रहे हैं। छोटा राज्य होगा तो अच्छे लोग राजनीति में आगे आएंगे। वहां की भौगोलिक और सांस्कृतिक स्थिति को देखते हुए विकास की योजनाओं को अच्छे से तैयार करेंगे।
Published on:
26 Aug 2017 03:41 pm
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