
वाराणसी. आईआईटी बीएचयू को दुनिया के 100 तथा देश के टॉप टेन तकनीकी शिक्षण संस्थानों में लाना ही मेरी प्राथमिकता होगी। इसके लिए स्टॉफ और अन्य लोगों से मिल कर उनका फीड बैक ले रहा हूं। तीन साल का वक्त है, इस अवधि में अपना लक्ष्य पूरा करेंगे ऐसा विश्वास है। यह कहना है आईआईटी बीएचयू के नए निदेशक प्रो पीके जैन का। वह सोमवार को संस्थान में मीडिया से मुखातिब थे।
प्रो जैन ने कहा कि सस्थान को ज्यादा से ज्यादा कंपटेटिव बनाना है। यहां के छात्र-छात्राओं में ऐसी ऊर्जा का संचार करना है कि वो पास आउट करने के बाद नौकरी खोजने की बजाय नौकरी देने वाला बन सकें। यही सरकार की भी मंशा है। और यह पोटेंशिलय है हमारे बच्चों में। उन्होंने कहा कि यह ध्रुव सत्य है कि दुनिया भर में जिनता पोटेंशियल और टैलेंट इंडियन स्टूडेंट्स में है वो और कहीं नहीं। बस उन्हें प्रेरित करना है ताकि वो अपना 100 फीसदी दे सकें, खुद के लिए, संस्थान के लिए और देश के लिए। कारण साफ है कि अब टेक्निकल एजूकेशन का दायरा ग्लोबल हो चुका है। ऐसे में हमें खुद भी ग्लोबलाइज होना होगा।
उन्होंने बताया कि रैंकिग पिछले चार साल से शुरू हुई है और इसके लिए शैक्षणिक वातावरण के साथ आधारभूत संरचना पर भी गौर किया जाता है। साथ ही सबसे महत्वपूर्ण है अपनी छवि बनाना और उसका ज्यादा से ज्यादा बेहतर प्रदर्शन करना है। कारण साफ है कि आप की छवि बहुत अच्छी है लेकिन कोई उसको जानता ही नहीं कि आप क्या कर रहे हैं, क्या स्टैंडर्ड है तो सब कुछ कर के भी आप जहां के तहां रह जाएंगे। ऐसे में हमारी कोशिश होगी कि संस्थान की छवि को सुधारें साथ ही उसका देश व दुनिया में प्रदर्शन भी हो।
बताया कि संस्थान को अपडेट करने के लिए आईआईटी बीएचयू के पुरातन छात्रों की मदद ली जाएगी। यहां का एलुमिनाई बहुत ही रिच है। हम उनकी मदद लेकर संस्थान के लिए निवेश को प्रेरित कर सकते हैं। इससे आधाभूत ढांचा भी मजबूत होगा। साथ ही यहां के छात्र-छात्राओं को ब्रेक भी मिलेगा। वो फोकस में आएंगे। संस्थान का विद्यार्थी रहते हुए उन्हें कहीं किसी कान्फ्रेंस में जाना हो तो उन्हें भेजा जा सकेगा। इससे विद्यार्थियों का भी मनोबल बढेगा और वो बेहतर प्रेजेंटेशन देंगे कहीं जा कर तो उसका भी लाभ संस्थान को ही मिलेगा।
निदेशक ने कहा कि वह बच्चों को मूल्यपरख शिक्षा देने, नैतिक बल प्रदान करने की भी कोशिश करेंगे। संस्थान को समाज उन्मूलक बनाने का भी प्रयास होगा, क्योंकि आज यह सबसे बड़ी जरूरत है कि तकनीकी शिक्षण संस्थानों में जो कुछ भी हो रहा है वह समाज के लिए उपयोगी हो। इसकी खातिर शोध की गुणवत्ता पर भी जोर दिया जाएग।