
गंगा
वाराणसी. गंगा प्रेमी और गंगा विज्ञानी प्रो जीडी अग्रवाल उर्प स्वामी सानंद के बलिदान दिवस 11 अक्टूबर से बनारस और हरिद्वार में गंगा प्रेमी शुरू करेंगे अनिश्चित कालीन अनशन शुरू करेंगे। इसकी घोषणा जल जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक डॉ संजय सिंह ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में की। उन्होंने मीडिया के समक्ष गंगा की वास्तविक स्थिति पर आधारित 184 पेज का श्वेत पत्र भी जारी किया।
डॉ. सिंह ने बताया कि गंगा की अविरलता के लिए 111 दिन तक आमरण अनशन करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाला प्रो अग्रवाल उर्फ स्वामी सानंद की प्रेरणा से ही जल पुरुष राजेंद्र सिंह की अगुवाई में 120 दिन की गोमुख से गंगा सागर तक की गंगा सद्भावना यात्रा की गई। इस यात्रा के दौरान पथिकों ने जो कुछ भी देखा वह काफी दुःखदायी रहा। उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार से पश्चिम बंगाल तक की यात्रा में गंगा का दारुण दृष्य ही दिखा। इसी पर आधारित यह श्वेत पत्र देश भर में जारी किया गया जिसे 7 सितंबर को वाराणसी में जारी किया गया है।
उन्होंने बताया कि अभियान के लोगों ने मिल बैठ कर तय किया है कि स्वामी सानंद के बलिदान दिवस से हरिद्वार और काशी में गंगा तट पर गंगा प्रेमी और श्रद्धालु अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे।
उन्होंने बताया कि गंगा नदी का प्रवाह तंत्र जो भारत की अध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है आज मृत प्राय अवस्था में है। प्रो जीडी अग्रवाल जिन्हें दुनिया स्वामी सानंद के नाम से जानती है उन्होंने गंगा के लिए 111 दिन के आमरण अनशन के बाद प्राण त्याग दिए। गंगा सद्भावना यात्रा इन्हीं स्वामी सानंद के बलिदान को समर्पित करते हुए डॉ राजेंद्र सिंह जल पुरुष ने शुरू की। इस यात्रा का उद्देश्य लोगों में गंगा के निर्मलता व अविरलता के प्रति जागरूक करना रहा। यह यात्रा 12 जनवरी 2019 को पश्चिम बंगाल में समाप्त की गई यात्रा के दौरान उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, व बंगाल में गंगा के प्रदूषण व उन कार्यों को देखना समझना वह विवेचना की गई जिनसे नदी की अविरलता में बाधा हो रही है। आज गंगा मृतप्रायः अवस्था में है।
बताया कि सरकारें आई व गई उन्होंने गंगा की सफाई के नाम पर करोड़ों खर्च किए लेकिन गंगा पहले से ज्यादा प्रदूषित है। इस यात्रा के दौरान लाखों लोग, राजनयिकों, सरकारी अफसरों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों से संवाद किया गया जिसका मुख्य उद्देश्य गंगा का पुनर्जीवन था। इस यात्रा के दौरान देखे गए तथ्यों व संवाद पर आधारित श्वेत पत्र बनाया गया जिसकी प्रमुख अनुशंसा इस तरह है...
-गंगा पर सभी प्रस्तावित डैम का निर्माण रोका जाए
- गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए उद्योगों का कचरा उसमें ना डाला जाए, ऐसे कानून बने
-गंगा के लिए प्रस्तावित बजट में गंगा किनारे के जीव जंतु की रक्षा के लिए भी बजट हो
- प्रदूषित पानी के ट्रीटमेंट के लिए प्रदूषणकारी उद्योग जिम्मेदार हों और खर्च का वहन करें
- उद्योगों को गंगा से दूर स्थापित किया जाए
-उद्योगों के प्रदूषित कचरे यानी के ट्रीटमेंट के लिए नई तकनीकों का प्रयोग हो
- गंगा एक्ट 2012 को कानून बनाया जाए ताकि गंगा की निर्मलता व अविरलता बनी रहे
बताया कि इस यात्रा के अंत में यह संकल्प लिया गया है की गंगा जागरूकता यात्रा पुनः 2019 में शुरू की जाएगी। इस पत्र में गंगा सद्भावना यात्रा के दौरान देखे गए तथ्य व भविष्य की कार्य योजना शामिल है।
इस मौके पर डॉ लेनिन रघुवंशी, अनिल शर्मा, आबिद शेख, शिरीन शबाना खान व अरविंद उपस्थित रहे।
Published on:
07 Sept 2019 05:20 pm
