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BREAKING-प्रो.योगेन्द्र सिंह बने जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्याल बलिया के पहले वीसी

परिसर पहुंचा राजभवन का आदेश, खुशी की लहर

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Devesh Singh

Dec 21, 2016

 Pro Yogendra Singh

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वाराणसी. महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के चीफ प्राक्टर व इतिहास विभाग के प्रो.योगेन्द्र सिंह को जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया का पहला वाइसचांसलर बनाया गया है। राज्यपाल राम नाईक के निर्देश पर उनके प्रमुख सचिव जितेन्द्र कुमार ने वीसी बनाने का आदेश जारी किया है। राजभवन से जैसे ही आदेश काशी विद्यापीठ पहुंचा है वैसे ही परिसर में हर्ष की लहर दौड़ गयी है। प्रो. योगेन्द्र सिंह को बधाई देने वालों का तांता लग गया है।
सपा सरकार ने ही बलिया में जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी है। अभी तक महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से ही बलिया जुड़ा है और बलिया के सरकारी व प्राइवेट कालेजों को काशी विद्यापीठ से संबद्धता लेनी होती है। सपा सरकार ने काशी विद्यापीठ का बोझ कम करने के लिए ही इस विश्वविद्यालय की स्थापना की तैयारी की है। वीसी की नियुक्ति से यह बात साफ हो जाती है कि जल्द ही विश्वविद्यालय का काम शुरू हो जायेगा और वहां के कालेज को अब चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय से संबद्धता लेनी होगी।


छात्रसंघ अध्यक्ष से चीफ प्राक्टर तक का सफर
प्रो.योगेन्द्र सिंह का महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पुराना नाता है। परिसर से उनका जुड़ाव बतौर छात्र के रूप में हुआ था बाद में वह 1986 में छात्रसंघ अध्यक्ष तक बने थे। इसके बाद उन्होंने इतिहास विभाग से बतौर शिक्षक अपनी नयी पारी की शुरूआत की है। प्रो.सिंह ने परिसर के कई महत्वपूर्ण पद पर जिम्मेदारी के साथ निर्वहन किया है। वर्तमान समय चीफ प्राक्टर का कार्यभार संभाल रहे थे। छात्रों व शिक्षकों के बीच सामंजस्य बनाने की क्षमता प्रो. योगेन्द्र सिंह को भीड़ से अलग करती है।


जानिए क्या कहा प्रो. योगेन्द्र सिंह ने
पत्रिका से बातचीत में प्रो.योगेन्द्र सिंह ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चन्द्रशेखर सिंह से उनका पुराना नाता है। मेरे विचार में आज भी युवा तुर्क जिंदा है। उनके नाम से बने विश्वविद्यालय का पहला वीसी होना मेरे लिए गौरव की बात है। ईश्वर ने मुझे मौका दिया है, जिससे युवा तुर्क का ऋण उतार सकूं। प्रो.सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की अभी स्थापना हो रही है इसलिए जिम्मेदारी बहुत महत्वपूर्ण है। इस जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वहन करते हुए विश्वविद्यालय की स्थापना का उद्देश्य पूर्ण करना है।

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