Kashi became No Beggar Zone before G-20 summit भिक्षावृत्ति निवारण अधिनियम 1975 के तहत भिक्षा मांगना अपराध है। ऐसे में काशी में अब आगे भी इसपर पूरी तरह प्रतिबन्ध रहेगा।
वाराणसी। भारत में इस साल जी-20 समिट होना है। इसकी पांच प्रमुख बैठकें प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी होनी है। इसे लेकर पूरे शहर में विशेष स्वच्छता और सुंदरीकरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके अलावा शहर और भारत की छवि अच्छी करने के लिए शहर बनारस को 'No Beggar Zone' बनाया जा रहा है। ऐसे में जिला प्रशासन और सामाजिक संस्था अपना घर आश्रम ने मिलकर काशी के भिखारियों का पुनर्वासन शुरू किया है।
वहीं कमिश्नर कौशल राज शर्मा के अनुसार जी-20 समिट के बाद भी काशी में भिखारियों के भीख मांगने पर पाबंदी रहेगी। अपना घर आश्रम में अभी तक 200 भिखारी पुलिस और नगर निगम की मदद से लाये जा चुके हैं।
400 भिखारी हुए चिह्नित
इस सम्बन्ध में जिला प्रशासन के साथ मिलकर कार्य कर रही अपना घर आश्रम सामाजिक संस्था के डॉ के निरंजन ने patrika.com को बताया कि बनारस पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में आने वाले महीने में जी-20 समिट को देखते हुए शहर को सजाया संवारा जा रहा है। पर्यटकों और विदेशी डेलीगेशंस के सामने भारत और काशी की छवि अच्छी जाए इसके लिए काशी को No Beggar Zone प्रशासन की तरफ से बनाया जा रहा है। हमें भिखारियों के पुनर्वासन का कार्य फरवरी माह में दिया गया था। इसमें हमने पूरे शहर में 400 एक्टिव भिखारी चिह्नित किये थे।
नगर निगम और पुलिस विभाग की ली जा रही मदद
उन्होंने बताया कि काशी को भिक्षावृत्ति से मुक्त करने के लिए हम नगर निगम और पुलिस की मदद ले रहे हैं। नगर निगम की 6 टीमें लगातार शहर में भ्रमण कर भिखारियों से वार्ता कर उनके भीख मांगने का कारण, उनके घर की आर्थिक स्थिति आदि पता कर उन्हें हमारे आश्रम को सौंप रही है। यहां लाये जा रहे भिखारियों के परिजनों का पता लगाया जा रहा है और जल्द ही उन्हें उनके घर भेजा जाएगा।
लावारिस और दिव्यांग भिखारियों को लाया गया आश्रम
डॉ के निरंजन ने patrika.com को बताया कि पुलिस हमारा बहुत सहयोग कर रही है और शहर में किसी भी थानाक्षेत्र में भिखारी दिखाई देने पर हमें सूचित किया जा रहा है। पुलिस स्वयं भी भिखारियों को यहां छोड़कर जा रही है। उन्होएँ बताया कि अभी तक 200 भिखारी यहां आ चुके हैं जो दिव्यांग और लावारिस हैं।
दशाश्वमेध और संकटमोचन पर सबसे अधिक मिले भिखारी
उन्होंने बताया कि हमारे सर्वे में सबसे अधिक भिखारी संकटमोचन मंदिर, दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट पर मिले। हम उन्हें आश्रम लाये हैं। ये सभी इलाके पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है इसलिए यहां से भिखारियों को हटाना बहुत बड़ी चुनौती थी। हमने वहां से उन्हें हटाया और हम उन्हें आश्रम लाये हैं, जो लावारिस हैं उन्हें हम उनके हुनर के हिसाब से ट्रेनिंग देकर उन्हें सशक्त भी करेंगे।
70 प्रतिशत प्रोफेशनल भिखारी
डॉ के निरंजन ने बताया कि हमने जब कार्रवाई शुरू की तो प्रोफेशनल भिखारियों में हड़कंप मच गया और रातों-रात ऐसे भिखारी जो बिना किसी मजबूरी के भीख मांग रहे हैं शहर से लापता हो गए। उन्हें ढूंढा भी गया पर वो नहीं मिले। इनमे कई दशाश्वमेध घाट और रेलवे स्टेशन पर चिह्नित हुए थे।
आज नो बेगर जोन बना वाराणसी
उन्होंने बताया कि शुक्रवार की सुबह हमने सभी चिह्नित स्थलों का दौरा किया लेकिन कहीं भी हमें कोई भिखारी नहीं मिला। साथ ही आज पुलिस और नगर निगम की टीम ने भी हमें कोई भिखारी की सूचना नहीं दी। इसलिए हम कह सकते हैं कि आज काशी नो बेगर जोन हो गया है।