सवा सौ साल पुराना काशी का धरोहर मालवीय ब्रिज जर्जर

 सवा सौ साल पुराना काशी का धरोहर मालवीय ब्रिज जर्जर

Ajay Chaturvedi | Publish: Aug, 05 2017 12:10:00 PM (IST) varanasi

कई बार रेलवे और पीडब्ल्यूडी कर चुका है मरम्मत। पुल की मियाद हो चुकी है पूरी। आवागमन किया जा चुका है बंद।

 

वाराणसी. सवा सौ साल से भी ज्यादा की उम्र पूरी कर चुका काशी का धरोहर मालवीय ब्रिज (राजघाट पुल) अब जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। बीते एक दशक में इस पुल की जाने कितनी बार मरम्त हुई। आवागमन अवरुद्ध हुआ। लेकिन मुकम्मल मुकाम हासिल नहीं हो सका। रह-रह कर इसके नट बोल्ट ढीले होते रहते हैं। अक्सर का काशन पर चलाई जाती हैं ट्रेन ताकि कोई दुर्घना न हो। पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने वाले इस इकलौते महत्वपूर्ण पुल की मियाद भी अब पूरी हो चुकी है। वक़्त के थपेड़ों को झेलता हुआ यह 1048.5 मीटर लम्बा पुल अब धीरे धीरे जर्जर हो रहा है। कहने को तो यह धरोहर है लेकिन किसी ऐतिहासक धरोहर की जिस तरह से रक्षा की जानी चाहिए वह दिखता नहीं। इस बीच जिस तरह से सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को यह बयान दिया कि देश के 100 पुल ऐसे हैं जो कभी भी र हो सकते हैं, उनकी मरम्मत की जरूरत है। ऐसे में काशी के लोगों को भी उम्मीद बंधी है कि उनके डफरिन ब्रिज (मालवीय पुल, राजघाट पुल) का भी जीर्णोद्धार होगा।

 

बता दें कि काशी का राजघाट पुल (मालवीय पुल) भारतीय उपमहाद्वीप का पहला पुल है। इसके ऊपर सड़क मार्ग तो नीचे रेलवे मार्ग है। इस पुल का निर्माण ब्रिटिश काल में 1887 में हुआ था। उस वक्त पूरे एशिया में यह अपनी तरह का पहला पुल था। पहले इसका नाम डफरिन ब्रिज था जिसे आजादी के बाद नाम बदल कर मालवीय सेतु किया गया। बनारस के लोग इसे राजघाट पुल के नाम से पुकारते हैं। यह पुल कई बार जर्जर हुआ और कई बार इसकी मरम्मत की गई लेकिन उचित देखभाल की कमी से हमेश यह खतरा बना रहता है कि कब न कोई बड़ा हादसा हो जाए। मां गंगा पर बना यह पुल एक अक्टूबर 1887 में पहली बार लोकार्पित हुआ। तब यह केवल रेलवे के आवागमन के लिए था। बाद में इसे पैदल और वाहनों के लिए खोला गया। डफरिन ब्रिज के नाम से इतिहास के पन्नों में दर्ज़ इस पुल का नाम आज़ादी के बाद 5 दिसंबर 1947 को बदला और इसे महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी को समर्पित करते हुए इसका नाम मालवीय पुल रखा गया। पुरनिये बताते हैं कि इस पुल को अवध और रूहेलखंड के इंजीनियरों ने मिलकर बनाया था। तत्कालीन महराज बनारस श्रीप्रसाद नारायण सिंह की उपस्थिति में इस पुल का उद्घाटन हुआ तो एक नयी इबारत लिखी गई।

कुछ साल पहले इस पुल की मियाद ख़त्म हो गयी थी, तब इस पर से भारी वाहनों का आवागमन तत्कालीन बसपा सरकार ने रोक दिया था, लेकिन दो साल पहले रेलवे और पीडब्ल्यूडी की आपसी सहमति से इसकी पैचिंग और बाइंडिंग की गई और समाजवादी सरकार के आते ही इसपर एक बार फिर से भारी वाहन आने जाने लगे। लेकिन अब इसके अस्तित्व को ख़तरा है। शेरशाह सूरी मार्ग (पुराना जीटी रोड) पर बना यह मालवीय पुल उत्तर प्रदेश और बिहार दो राज्यों को जोड़ने वाला प्रमुख पुल है। साथ ही पूर्वांचल से बंगाल को जोड़ने का भी यह प्रमुख माध्यम है। लेकिन इसकी एक बाइंडिंग जुलाई 2014 में इस कदर टूट गई की इसमें से नीचे जाती ट्रेन आसानी से देखी जा सकती थी। साथ ही इसपर लगी लोहे की बाइंडिंग प्लेट भी टूट गई थी जो वाहनों के गुज़रने पर हिल रही थी। उसके बाद से ही इस पुल पर भारी वाहनों का प्रवेश निषेध कर दिया गया। यह दीगर है कि पुलिस की सांठ गांठ से इसपर आधी रात के बाद कोयला, बालू और गिट्टी लदे ट्रकों का आवागमन होता रहता है।

 

अब तो यह कहा जाने लगा है कि यदि जल्द ही बड़े वाहनों को इसपर चलने से न रोका गया तो आने वाले दिनों में बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। इस पुल से दिन भर में कई वीआईपी लोगों का आना जाना होता है। वाराणसी के सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह के गृह जिले चंदौली को जोड़ने वाले इस पुल का जीर्णोद्धार कब होगा यह देखने का विषय है। मालवीय पुल नॉर्दन रेलवे के हिस्से में आता है। इसके रखरखाव से लेकर सुरक्षा तक का सारा इंतजाम नार्दन रेलवे के जिम्मे है। रेलवे इसे लेकर कितनी संजीदा है पुल की हालत देखकर साफ समझ आता है। बूढ़े हो चुके इस पुल को भारी नुकसान हो रहा है। रेलवे के अधिकारी पुल को पूरी तरह से सुरक्षित और ठीक- ठाक मानते हैं। इस पर भारी वाहनों के भागदौड़ के लिए स्थानीय प्रशासन को दोषी ठहराते हैं। इस संबंध में जब शुक्रवार को पत्रिका ने बनारस रेलवे से जुड़े चीफ एरिया मैनेजर रवि चतुर्वेदी से बात की तो उन्होंने कहा, इस पुल को क्या हुआ। यह पुल दुरुस्त है। इस पर भारी लोड है, ट्रैफिक काफी ज्यादा है। अभी कल ही मैं इसी पुल से बनारस से दिल्ली आया हूं। इसे लेकर बहुत घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क परिवहन मंत्री ने जिन जर्जर पुलों पर चिंता जताई है उसमें यह नहीं आता।

 

 

 

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned