
arthritis patients (symbolic photo)
वाराणसी. यूं तो काशी प्राचीन काल से ही चिकित्सा और शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। भगवान धनवंतरी की कर्मस्थली रही ये काशी। वो परंपरा आज भी कायम है। इसी के तहत अब एक अस्थि रोग विशेषज्ञ ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। इससे गठिया और ऐसी ही अन्य गंभीर बीमारियों में घुटने का ट्रांसप्लांटेशन कराने की जरूरत नहीं होगी। बहुत कम खर्च में मरीज आराम से पहले की तरह न केवल चलफिर सकेगा बल्कि पालथी मार कर बैठ भी सकेगा। यह कामयाबी मेक इन इंडिया के तहत हासिल की गई है जो पूरी तरह से स्वदेशी है। इसे पेटेंट भी करा लिया गया है।
स्वदेशी एच टी ओ प्लेट से बिना ट्रासप्लांटेशन मिलेगी गठिया जैसी बीमारियों से मुक्ति
वाराणसी के वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ (आर्थोपेडिक सर्जन), उत्तर प्रदेश आईएमए के उपाध्यक्ष डॉ. अजीत सैगल ने एक ऐसी स्वदेशी एचटीओ प्लेट ( High Tibal Osteotomy Plate) विकसित की है जो घुटने की गठिया ( Osteo Arthritis Knee) तथा इसी तरह की अन्य बीमारियों से मुक्ति दिलाएगा और वो भी बिना ट्रांसप्लांटेशन के। बता दें कि गठिया व इस तरह की अन्य बीमारियों के कारण पैर टेढ़े-मेढे हो जाने से मरीज का जीवन अपाहिजों सरीखा हो जाता रहा है। लेकिन अब ये पूर्ण रूप से स्वदेशी तकनीक से उसे नव जीवन मिलेगा। इस एचओटी प्लेट का केंद्र सरकार के जरिए जुलाई 2022 में पेटेंट (नंबर- 401029) भी करा लिया गया है।
एचटीओ से नहीं करना होगा प्रत्यारोपण
डॉ सहगल का कहना है कि ये कामयाबी मेक इन इंडिया अभियान से प्रभावित होकर हासिल हुई है। पूरी तरह से स्वदेशी एचटीओ, गठिया के एडवांस स्टेज-3 के मरीजों को ऑपरेट कर लगा देने से जोड़ों को बदलने की जरूरत नहीं होगी। इस प्लेट के लगने से टेढ़े पैर सीधे हो जाते हैं। प्लेट की कीमत अत्यंत कम होने से सामान्यजन के साथ ही आयुष्मान जैसी योजना से जुड़े गरीबों को भी इसका लाभ मिल सकता है। पेटेंट कराने से पहले परीक्षण के तौर पर एचटीओ प्लेट के सौ से ज्यादा हुए ऑपरेशन शत प्रतिशत सफल रहे हैं।
इस नई तकनीक के प्रयोग से 15 दिन में मरीज को मिल जाएगा नव जीवन
स्वदेशी एचटीओ प्लेट के आविष्कारक डॉ. सैगल ने बताया कि साधारण ऑपरेशन कर प्लेट लगाए जाने के दूसरे दिन ही मरीज घुटने की कसरत करने लगता है। इसमें प्लास्टर भी नहीं लगाए जाते जिससे एक पखवारे(15 दिनों में ही मरीज आराम से चलने फिरने लगता है। पूरा घुटना मोड़ने कर पालथी लगा कर बैठ सकता है। उन्होंने बताया कि ये एच टी ओ प्लेट घुटने के पास की हड्डियों में लगाई जाती है जो आगामी 30 साल तक खराब नहीं होती। इसकी जरूरत 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में पड़ने से मरीज 80-90 साल से ज्यादा उम्र तक सामान्य रूप से चल फिर सकता है।
क्या है एचटीओ
डॉ सहगल ने पत्रिका संग बातचीत में बताया कि एचटीओ का फुल फार्म मतलब हाई टिवियल ऑस्टिऑटमी है। ये टाइटेनियम स्कू आधारित प्लेट है। येएक तरह से ठीक उसी तरह से काम करता है जैसे किसी मकान की छत ढालने के लिए उसे बीम से सहारा दिया जाता है। उसी तर्ज पर इसमें भी पहले घुटने से नीचे के टेढे पैर का एक्स-रे निकाल कर पूरी स्थित का अध्ययन करते हैं। फिर ऑपरेशन के जरिए घुटने के नीचे के हिस्से में ***** करते हैं। फिर वहीं जरूरत के हिसाब से टाइटेनियम स्क्रू को ***** में फिट किया जाता है, जिससे पैर पूरी तरह से सीधा हो जाता है और 15 दिन में ही आराम हो जाता है। पैर बिल्कुल सीधा हो जाता है और मरीज न केवल चल पाता है बल्कि पालथी मार कर बैठने लगता है। ऐसे कुछ ऑपरेशन वो सफलता पूर्वक कर चुके हैं। ऐसे मरीज जो बिल्कुल नहीं चल पा रहे थे वो चलने लगे हैं।
देश में 25 फीसद लोग हैं गठिया से पीड़ित
डॉ सहगल के मुताबिक हाल ही में देश में हुए सर्वे के अनुसार 50 वर्ष की उम्र से ज्यादा 25 फीसद ऐसे लोग है जो घुटने की गठिया रोग से पीडि़त हैं। घुटना खराब होने से पैर टेढ़े होने की बीमारी भी आम है। समय रहते अच्छी तरह से माकूल इलाज न होने की सूरत में पीडि़त मरीजो में से 50 फीसद गठिया के एडवांस स्टेज (स्टेज-4) में पहुंच जाते हैं। ऐसे में ऑपरेशन कर जोड़ों को बदलने की जरूरत पड़ती है। ये तकनीक काफी खर्चीली है जिसके चलते बहुतेरे तो प्रत्यारोपण का खर्च भी नहीं उठा पाते, जिसके चलते उनका जीवन अपाहिजों सरीखा हो जाता है। वो पराश्रित का जीवन जीने को विवश होते हैं अथवा व्हील चेयर पर निर्रभर हो कर रह जाते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सामान्यजन भी इस रोग से कम खर्च में पूरी तरह स्वस्थ हो सकेगा।
Published on:
27 Aug 2022 09:03 am

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